Thought-For-The-Day-बेहतर-स्वास्थ्य-सेवाओं-के-लिए-चाहिए -इंसानियत-के-जज्बे-का-इंजेक्शन

 सागर वॉच

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 शेखचिल्ली की डायरी - 11-मंगलवार -2021

प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री द्वारा सभी अस्पतालों में लिफ्ट व अग्निशमन उपकरणों की सेहत की जांच के लिए मंत्री द्वारा निर्देश जारी करना एक अच्छा कदम है। लेकिन इसके साथ ही इन अस्पतालों में किए जा रहे ईलाज की गुणवत्ता व  उसके लिए वसूले जा रहे दाम का आडिट कराया जाना जरूरी है। 

जिला कलेक्टर के निर्देश पर सागर शहर के निजी अस्पतालों की जांच के लिए गठित समिति को जो खामियां मिली हैं वो इस बात की मिसाल हैं। निजी अस्पतालों में सबकुछ अच्छा नहीं है। इन अस्पतालों में मरीजों से ईलाज के लिए मनमानी फीस वसूली जा रही है साथ ही मरीजों को उपचार से ईतर सेवाओं में भी खामियां नजर आ रहीं हैं।

इतना ही नहीं अब सरकार ने इन्हीं निजी अस्पतालों को आयुष्मान कार्ड धारक कोविड के मरीजों के मुफ्त ईलाज की भी जिम्मेदारी सौंप दी है। इसके साथ ही निजी अस्पतालों के कामकाज पर नजर रखने की अतिरिक्त जिम्मेदारी अब जिला प्रशासन को उठाना होगी। जरूरत इस बात की है सरकारों को कोई ऐसा तंत्र तो विकसित करना होगा जिससे अस्पतालों में खासतौर पर निजी अस्पतालों में मरीजों को उचित दाम पर सही ईलाज मिले।

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 साथ ही दवाईंया भी असली व वाजिब दामों पर मिलती रहें।  कोरोना महामारी के दौर में ढेरों ऐसे मामले सामने आते जा रहे हैं जिनमें चिकित्सा व्यवसाय से जुड़ें जाने माने व्यापारी व चिकित्सक लोभ-लालच के चलते नकली दवाओं के कारोबार में लिप्त हो गए। सागर में ही रेमडीसिविर इंजेक्शन की कालाबाजी करते हुए दवा कंपनी का प्रतिनिधि पकड़ा गया। कुछ ही दिन पहले दिल्ली में भी नामी अस्पताल का डाक्टर भी इन्हीं इंजेक्शनों की कालाबारी करते पकड़ा गया।

कोरोना महामारी के प्रकोप के चलते सरकार ने शासकीय चिकित्सालयों व मेडिकल काॅलेजों को स्वास्थ्य संबंधी उपकरण मुहैया कराने में कोई  कसर बाकी नहीं छोड़ी लेकिन देखने में आया है कि उपकरण अस्पतालों में बेकार पडे़ें है चिकित्सक उनके उपयोग करने में रूचि ही नहीं ले रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है सरकार के लिए इस विषय पर गंभीरता से सोचना पड़ेगा। 

पहले लोगों की जान अस्पतालों में उपकरण की कमी से जाती थी अब उपकरणों के उपयोग नहीं करने के लिए जाती है। निजी अस्पतालों के चिकित्सा के आला दर्जे के उपकरण उपलब्ध हैं तो वे मरीजों उनकी ऐसी कीमत वसूलते हैं मरीज बीमारी से भले ही बच जाए पर उनका अस्पतालों का बिल चुकाने व उसके परिवार की ही जान सी निकल जाती है।

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स्वास्थ्य के क्षेत्र में जनता की भलाई के अच्छे अस्पताल, अच्छे उपकरण व काबिल चिकित्सकों के अलावा अच्छी नियत का होना भी अनिवार्य है। सरकार जरा इस ओर भी ध्यान लगाए कि चिकित्सा उद्योग में उपचार व चिकित्सक कैसे अधिक मानवसंवेदी बनाए जा सकते हैं। आम जनता को ऐसा लगने लगा है कि स्वास्थ्य सेवाओं को असरदार बनाने के लिए अच्छी दवाओ,उपकरणें व चिकित्सक के साथ मानव संवेदनाओं के इंजेक्शन की भी जरूरत है।

इंसानियत की रौशनी गुम हो गई कहां, साए तो हैं आदमी के मगर आदमी कहां?


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