Webinar-on-Covid-19-"मन-चंगा-हो-तो-शरीर-को-आसानी-से-नहीं-पकड़-पाते-हैं-रोग"

सागर  वॉच @
  मानसिक रुप से स्वस्थ्य शरीर पर कोई भी रोग आसानी से पकड़ नही  बना  सकता और  यदि कोई  रोग  शरीर में  प्रवेश कर  भी  जावे तो इसे  जल्दी ही  मानसिक रुप  से  स्वस्थ्य शरीर के  छोड़ना ही  होता है। 
 विश्व स्वास्थ्य संगठन के पहले महानिदेशक ब्रॉक चिशहोम ने भी कहा है कि “बगैर मानसिक स्वास्थ्य के, शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर नहीं हो सकता है”।  प्रसिद्ध वैज्ञानिक जर्नल-लंसेंट ने  भी वैज्ञानिक शोधों के  आधार पर  कहा  है  कि   मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के  बीच आपसी सम्बंध होता है । सहोद्रा राय शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, सागर द्वारा आयोजित ऑनलाईन वेबीनार “कोविड-19 महामारी- तनाव से मुकाबला” में  यह  बात राष्ट्रीय स्तर पर 1500 से अधिक मोटिवेश्नल उद्बबोधन दे  चुके विषय प्रवर्तक प्रो. अमर  सिंह ने  कही।

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उन्होंने बताया कि कोरोना  संक्रमण के  इस  दौर  में  मानव  जीवन पर एक गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ रहा  है। जो परिवार कोरोना से पीड़ित भी नहीं हैं वो भी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।  ऐसे दौर में  समाज के लिए कोरोना से  निपटने के लिए चिकित्सीय उपकरणों, संसाधनों व दवाईयों के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक तरीके की भी जरूरत है । परंतु सबसे बड़ा  सवाल यह ही है कि ऐसा  करें कैसे ?

घर  में  हमेशा सकारात्‍मक बातें करें 

इस सवाल का खुद ही जवाब देते हुए प्रो सिंह ने बताया कि तन और मन को  सेहतमंद  रखने के  लिए कुछ नया सीखते रहना चाहिए और नया करने का प्रयास भी करते रहना चाहिए । उन्होंने वेदों एवं पुराणों हवाला देते हुए कहा  कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ दिमाग रहता है। इसलिए प्रतिदिन व्यायाम, आसन, प्राणायाम करना चाहिए  तथा शरीर को स्वच्छ रखना भी आवश्यक है । चूकिं इस  दौर  में  हम  सब  घर  पर  ही  हैं  अतः  प्रयास करें कि  घर  में  हमेशा सकारात्‍मक बातें ही होती रहें । घर के  बुजुर्ग एवं  बच्चों के  साथ आवश्यक रुप  से  समय  व्यतीत करें । 

घर में अच्छा काम करने वालों की तारीफ़ भी करें 

घर  में  इंडोर गेम्स खेलते रहें । ऐसा  करने से परिवार में जुड़ाव व आपसी तालमेल भी मजबूत होगा । घर में  किसी भी  सदस्य द्वारा कुछ  भी नया  कार्य  किया गया  हो  या खेल  में  जीत  दर्ज की  गई  हो या खाना और  नाश्ता  बनाया गया हो तो तारीफ करते रहें व किसी भी  रुप  में  इन्हें पुरस्कृत  भी  करें ।  मित्रों एवं  रिश्तेदारों के  साथ  सकारात्मक बात-चीत  से  भी तनाव कम  होगा । 

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जरूरतमंदों की मदद करें 

इस  संकट के  दौर  में  यदि  आप  किसी जरुरतमंद की  मदद करेंगें तो  आपको आत्मिक शांति व सुकून मिलेगा व आपका तनाव भी  कम होगा ।   कभी-कभी घर  में  आपसे मन-मुटाव भी  हो  सकता  है  । यदि  आपको गुस्सा भी  आ रहा  हो  तो तुरंत  ही  बैठ जावें व गहरी सांसे लीजिए, आप पाऐंगें कि  आपका गुस्सा चला  गया  है  व तनाव भी  कम  हो  गया  है । 

कम से कम आठ घंटे की नींद लें 

इसके अलावा स्वस्थ्य आहार लें  व सात  से  आठ घंटे की  नींद अवश्य लें । हमें  परिस्थिति अनुसार चेतना का  विस्तार  करना होगा व  इस  प्रकार   आत्मबल का  विस्तार  होगा व विजय  प्राप्त  करना  होगा । हमें  तीन  तरह से ऊपर उठना होगा -  वैज्ञानिक अभिरुचि व चेतना का  विस्तार करना होगा,  दूसरों  से ज्यादा मेहनत करनी होगी व दूसरों  से कम उम्मीद करना चाहिए । 

 दुनिया के अधूरे  रह गए अच्छे कामों को पूरा करने की कोशिश करें 

कोरोना  के  इस  दौर  में तकनीक  का  बहुत  बेहतर उपयोग किया गया है ।  खासतौर  पर ऑनलाईन कक्षाओं , वेबीनार, ऑनलाईन  मीटिंग आदि का उपयोग बहुत  अच्छे से   किया  है । चिकित्सीय इतिहास में  पहली  बार केवल  2-3  माह  में  ही वैक्सीन की  खोज की  गई । यदि  दुनिया  किसी  अच्छे कार्य  को नही  कर  पाई  है  तो  हमारी  कोशिश  होनी  चाहिए  कि  वह  कार्य  हम  सफलतापूर्वक  कर  सकें । 

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इस मौके पर  महाविद्यालय के  प्राचार्य डॉ.  वाय. पी.  सिंह ने  कहा  कि छात्र-छात्राओं को अपने आप को व्यक्त करने के तरीके खोजने होंगें। चाहे कॉपी पर कुछ लिखे या कविता लिखें, चित्र बनाऐं, विडियों बनाऐं, ब्लॉग लिखें या खुद  को  व्यक्त करने कोई न कोई  काम अवश्य करें। ऐसा  करने से तनाव को दूर होता  है और  हर दिन आगे बढ़ने के उत्साह बनता है।यह वायरस मजबूत व्यक्ति को भी हाइपोकॉन्ड्रिअक्स में बदल सकता है।

 इंटरनेट पर इस  रोग  के  बारे में जरुरत से  ज्यादा पढ़ना,उसके लक्षणों का अनुभव करने वाले लोगों के बारे में पढ़ना, किसी को भी परेशान कर  सकता है। शरीर में थोड़ा भी बदलाव होने पर हम  खुद को जांचना शुरू कर सकते हैं  और आपना दिमाग संभावित रोगों के  लिए दौड़ना शुरू कर सकता है। 

 वह यह पता लगाने की कोशिश करने लगता है कि कहीं बीमारी ने पकड़ तो नहीं लिया। भले  ही  बीमारी हम  से  कोसों दूर  हो पर हम चिंताओं से घिर जातेे हैं  और खुद  को बीमार समझने लगते हैं। हमें सुनिश्चित करना  होगा कि घबराहट और तनाव में न रहें क्योंकि यह लंबे समय में हमारी प्रतिरक्षात्मक क्षमता को  कम  करता है ।

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ज्ञान आधारित प्रसिद्ध वैबसाईट विकिपीडिया ने  भी कहा  है  कि कोविड-19 जैसी महामारी के संक्रमण से बचने और अन्य लोगों में इस बीमारी के फैलने, स्वास्थ्य की देखभाल करने और मरने के कारण लोगों के काम और अपनों से सामाजिक दूरियाँ बढ़ गयी है। जिससे व्यक्ति में तनाव की स्थिति बढ़ती जा रही है।

यह महामारी एक दूसरे से छूने से फैलती है इसलिए लोग परिवार में किसी व्यक्ति के संक्रमित, उनकी रक्षा, देखभाल करने से डरे हुए है। साथ ही परिवार के बुजुर्ग और अस्वस्थ्य व्यक्तियों की देखभाल करने से दूर भाग रहे है। इस कारण लोग इस बीमारी से और भी ज्यादा डर रहे है द्य

इस  वेबीनार में सहोद्रा राय  शासकीय महाविद्यालय के अलावा प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों एवं  सागर जिले के शिक्षा विभाग के शिक्षकों, छात्र-छात्राओं ने भाग लिया एवं  लाभ  प्राप्त किया 

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Covid-Vaccination-18-वर्ष-से-अधिक-उम्र-के -व्यक्तियों-का-वैक्सीनेशन-बुधवार-से-बड़े-स्तर-पर

सागर वॉच @
आखिरकार लंबे इंतेज़ार के बाद,18-वर्ष से अधिक उम्र के  व्यक्तियों का वैक्सीनेशन कल बुधवार 12 मई से  सागर में 13 केन्द्रों पर किया जाएगा।  जिनके पंजीयन हुए है। उनको स्लाट बुकिंग में स्थान बताया जाएगा। कलेक्टर दीपक सिंह ने बताया कि सभी  एसडीएम, सीईओ जनपद पंचायत और  सीएमओ नगरपालिका से  अपने-अपने  क्षेत्र के  केन्द्रों में शत प्रतिशत वैक्सीनेशन कराएँ। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च प्राथमिकता इस कार्य कि लक्ष्य के मुताबिक रोज  मॉनिटरिंग भी करें। लक्ष्य से पीछे रहने   पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।


सागर शहर में छह स्थानों जिसमें महारानी लक्ष्मीबाई विद्यालय क्रमांक 1 बस स्टैंड के पास, पुलिस ट्रेनिंग ग्राउंड कचहरी रोड ,पुलिस लाइन स्कूल ,न्यू कैंट स्कूल सदर ,हुलासिराम मुखरिया हाई स्कूल सदर एवं कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय तिली रोड सागर सहित अन्य विकास खंडों में भी वैक्सीनेशन किया जाएगा।

Poetry-फिर-घर-आँगन-महकाएगी

  फिर घर आँगन महकाएगी 

 

फिर से धरती मुसकाएगी

          फिर गीत खुशी के गाएगी

 फिर फूल खिलेंगे बगिया में

           फिर से सावन रुत आएगी।



हम दूर अभी एक दूजे से रहने को माना शापित हैं यह दूरी हमको निश्चित ही कुछ और पास ले आएगी।

अब कौन बचा ऐसा जिसको
खोने के दुःख का भान नहीं
सामूहिक दुःख की अनुभूति
हम सब को एक बनाएगी।

यह धरा पढ़ाती है हम को अति कोमलता से पाठ कई सब याद रखें अथवा इतनी निष्ठुरता से समझाएगी।

तब राह नई बन पाएगी।
सब शासित शासक सजग रहें
चेताएँ भी चिन्तित भी हों
हम भूल अगर स्वीकार करें


माना पतझड़ की बेला में दुःख भी है गहन उदासी है
लेकिन वसन्त की पुरवाई

फिर घर आँगन महकाएगी।
साभार : संतोष रोहित

 सागर वॉच

Thought-For-The-Day-बेहतर-स्वास्थ्य-सेवाओं-के-लिए-चाहिए -इंसानियत-के-जज्बे-का-इंजेक्शन

 शेखचिल्ली की डायरी - 11-मंगलवार -2021

प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री द्वारा सभी अस्पतालों में लिफ्ट व अग्निशमन उपकरणों की सेहत की जांच के लिए मंत्री द्वारा निर्देश जारी करना एक अच्छा कदम है। लेकिन इसके साथ ही इन अस्पतालों में किए जा रहे ईलाज की गुणवत्ता व  उसके लिए वसूले जा रहे दाम का आडिट कराया जाना जरूरी है। 

जिला कलेक्टर के निर्देश पर सागर शहर के निजी अस्पतालों की जांच के लिए गठित समिति को जो खामियां मिली हैं वो इस बात की मिसाल हैं। निजी अस्पतालों में सबकुछ अच्छा नहीं है। इन अस्पतालों में मरीजों से ईलाज के लिए मनमानी फीस वसूली जा रही है साथ ही मरीजों को उपचार से ईतर सेवाओं में भी खामियां नजर आ रहीं हैं।

इतना ही नहीं अब सरकार ने इन्हीं निजी अस्पतालों को आयुष्मान कार्ड धारक कोविड के मरीजों के मुफ्त ईलाज की भी जिम्मेदारी सौंप दी है। इसके साथ ही निजी अस्पतालों के कामकाज पर नजर रखने की अतिरिक्त जिम्मेदारी अब जिला प्रशासन को उठाना होगी। जरूरत इस बात की है सरकारों को कोई ऐसा तंत्र तो विकसित करना होगा जिससे अस्पतालों में खासतौर पर निजी अस्पतालों में मरीजों को उचित दाम पर सही ईलाज मिले।

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 साथ ही दवाईंया भी असली व वाजिब दामों पर मिलती रहें।  कोरोना महामारी के दौर में ढेरों ऐसे मामले सामने आते जा रहे हैं जिनमें चिकित्सा व्यवसाय से जुड़ें जाने माने व्यापारी व चिकित्सक लोभ-लालच के चलते नकली दवाओं के कारोबार में लिप्त हो गए। सागर में ही रेमडीसिविर इंजेक्शन की कालाबाजी करते हुए दवा कंपनी का प्रतिनिधि पकड़ा गया। कुछ ही दिन पहले दिल्ली में भी नामी अस्पताल का डाक्टर भी इन्हीं इंजेक्शनों की कालाबारी करते पकड़ा गया।

कोरोना महामारी के प्रकोप के चलते सरकार ने शासकीय चिकित्सालयों व मेडिकल काॅलेजों को स्वास्थ्य संबंधी उपकरण मुहैया कराने में कोई  कसर बाकी नहीं छोड़ी लेकिन देखने में आया है कि उपकरण अस्पतालों में बेकार पडे़ें है चिकित्सक उनके उपयोग करने में रूचि ही नहीं ले रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है सरकार के लिए इस विषय पर गंभीरता से सोचना पड़ेगा। 

पहले लोगों की जान अस्पतालों में उपकरण की कमी से जाती थी अब उपकरणों के उपयोग नहीं करने के लिए जाती है। निजी अस्पतालों के चिकित्सा के आला दर्जे के उपकरण उपलब्ध हैं तो वे मरीजों उनकी ऐसी कीमत वसूलते हैं मरीज बीमारी से भले ही बच जाए पर उनका अस्पतालों का बिल चुकाने व उसके परिवार की ही जान सी निकल जाती है।

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स्वास्थ्य के क्षेत्र में जनता की भलाई के अच्छे अस्पताल, अच्छे उपकरण व काबिल चिकित्सकों के अलावा अच्छी नियत का होना भी अनिवार्य है। सरकार जरा इस ओर भी ध्यान लगाए कि चिकित्सा उद्योग में उपचार व चिकित्सक कैसे अधिक मानवसंवेदी बनाए जा सकते हैं। आम जनता को ऐसा लगने लगा है कि स्वास्थ्य सेवाओं को असरदार बनाने के लिए अच्छी दवाओ,उपकरणें व चिकित्सक के साथ मानव संवेदनाओं के इंजेक्शन की भी जरूरत है।

इंसानियत की रौशनी गुम हो गई कहां, साए तो हैं आदमी के मगर आदमी कहां?


सागर वॉच @  News-In-Short: समाचार संक्षेप 

News-In-Short-अस्पताल-उपकरणों-का-कराएँ-ऑडिट

अस्पताल उपकरणों का कराएँ ऑडिट 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ने प्रदेश के सभी शासकीय व निजी अस्पतालों को उनके लिफ्ट व अग्नि शमन उपकरणों का आडिट एक हफ्ते के अंदर कराने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण सभी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी है। इससे अस्पतालों में बिजली की खपत व लिफ्ट का उपयोग बढ़ा है इसलिए इन उपकरणों का चुस्त-दुरूस्त रहना जरूरी है।

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सब्जी मंडी

सागर कलेक्टर के आदेश से मंगलवार से शहर में सब्जी की खरीद-फरोख्त खुरई मार्ग स्थित गल्ला मंडी का परिसर से होगी। यह बदलाव खेल परिसर के पास शुरू हुई सब्जी मंडी में अत्यधिक भीड  होने की वजह से किया गया है। वहीं


अस्पतालों में मिली खामियां -नोटिस जारी


कलेक्टर के निर्देश पर शहर के निजी अस्पतालों की व्यवस्थाओं की जांच के लिए गठित समिति ने सोमवार को भी अस्पतालों का निरीक्षण किया। जांच में दल को को तिली मार्ग पर स्थित आयुष्मान अस्पताल में जहां दिशा सूचक लगे नहीं मिले वहीं बालाजी अस्पताल में चिकित्सक नदारद मिले इसके अलावा  चैतन्य अत्यधिक भीड़ होने के कारण अव्यवस्था नजर आयी। इन खामियों के लिए सभी अस्पतालों को संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। शहर के  नौ निजी अस्पतालों को  लिए आयुष्मान कार्ड धारक कोविड मरीजों के मुफ्त ईलाज के लिए चिन्हित किया है। कलेक्टर ने ऐसे सभी अस्पतालों को आयुष्मान कार्ड धारक कोविड मरीजों के उपचार के लिए 20 बिस्तर आरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं। 

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शाम 5 से 6 बजे के बीच करे वैक्सीनेशन स्लॉट

जिला टीकाकरण अधिकारी सागर डॉ एस.आर.रोशन ने बताया कि 18 से 44 आयु वर्ग वालों को कोविड-19 टीकाकरण के लिए ऑनलाईन बुकिंग सांय 5 से 6 के बीच में खुलेगी जिसमें स्लॉट खुलेगा। स्लॉट बुकिंग होने के बाद हितग्राही टीकाकरण केन्द्र पर ऑनलाईन पंजीयन का स्क्रीन शॉट प्रस्तुत करेंगे जिससे उनका टीकाकरण किया जावेगा। हितग्राही द्वारा ऑनलाईन पंजीयन होने के बाद उनके द्वारा चिन्हित किये गये केन्द्रों पर उन्ही व्यक्तियों का टीकाकरण किया जावेगा। टीकाकरण हेतु प्रत्येक टीकाकरण केन्द्र पर 100 का लक्ष्य रखा गया है । जिनकी ऑनलाईन बुकिंग एक दिन पूर्व 11, 12, 14 मई को क्रमशा होगी उनका टीकाकरण 12, 13 एवं 15 मई को किया जावेगा।

Report @ Somya Samaiya
MP's-First-1000-beds-Oxygen-Ready-Covid-Care-Center-पहला-चरण-शुरू-होगा-25-मई-तक

सागर वॉच @
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केन्द्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को साग़र जिले के बीना में बीओआरएल के निकट नवनिर्मित अस्थाई 1000 बिस्तर के अस्थायी कोविड अस्पताल का निरीक्षण किया और अस्पताल के निर्माण संबंधी बैठक भी ली।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, यह प्रदेश का पहला ऑक्सीजन सप्लाई आधारित अस्थाई अस्पताल है, जहाँ पलंग तक डायरेक्ट ऑक्सीजन पाईप लाईन रहेगी। यह अस्पताल सर्व सुविधायुक्त बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि आने वाले समय में मध्यप्रदेश ऑक्सीजन की उपलब्धता के मामले में भी आत्म-निर्भर बनकर उभरे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हमें कोरोना से हर मुक़ाबले के लिए तैयार रहना होगा। इस सिलसिले में बड़े ऑक्सीजन प्लांट्स की स्थापना प्रदेश में की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में गेल, आयनॉक्स जैसी संस्थाओं से भी बातचीत जारी है।

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केन्द्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यहाँ अस्पताल का बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहा है। बीना रिफाईनरी की इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन को मेडिकल ऑक्सीजन में कन्वर्ट कर मरीज़ों के लिए उपयोग में लिया जाएगा। यह एक बड़ा प्रोजेक्ट है जो साग़र, विदिशा, अशोकनगर और गुना सहित आसपास के ज़िलों के कोविड मरीजों के लिए बड़ी सौग़ात साबित होगा।

केंद्रीय मंत्री श्री प्रधान ने कहा कि ऑक्सीजन की उपलब्धता के मामले में केंद्र एवं मध्यप्रदेश शासन लगातार मिलकर कार्य कर रहे हैं। शीघ्र ही मध्यप्रदेश ऑक्सीजन के मामले में आत्म-निर्भर होगा।

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स्थल निरीक्षण और रोडमेप की समीक्षा

मुख्यमंत्री श्री चौहान एवं केन्द्रीय मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने अस्थाई अस्पताल स्थल का निरीक्षण किया तथा मौक़े पर ही सम्पूर्ण रोडमेप की समीक्षा भी की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अस्पताल से संबंधित विभिन्न कार्यों हेतु नियुक्त एजेंसी तथा कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने यहाँ ऑक्सीज़न प्लांट, ऑक्सीज़न टेस्टिंग, कंप्रेसर कक्ष के निर्माण, ऑक्सीजन सप्लाई की 800 मीटर लंबी पाइपलाइन, दुर्गापुर से कंप्रेसर की शिफ्टिंग, अतिरिक्त स्टैंडबाय कंप्रेशर का क्रय, बॉटलिंग प्लांट संबंधित कार्यों की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि यहाँ बॉटलिंग प्लांट स्थापित कर अन्य ज़िलों की ऑक्सीजन की आवश्यकता को भी पूरा किया जाएगा।

हवा, पानी, तूफ़ान से भी सुरक्षित होगा कोविड अस्पताल

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भले ही यह एक अस्थायी अस्पताल है, परंतु इसे सर्व सुविधायुक्त तथा हर प्रकार से सुरक्षित अस्पताल बनाया जा रहा है। मौसम के ख़राब होने की स्थिति में भी यह अस्पताल हवा, पानी, तूफ़ान आदि सभी से सुरक्षित रहेगा।

वेस्ट मैनेजमेंट का रखा जाए ख़ास ध्यान

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि, अस्पताल से संबंधित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, मेडिकल वेस्ट, लिक्विड वेस्ट आदि का वैज्ञानिक निपटारा और प्रबंधन किया जाए। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता ज़ाहिर की कि, विद्युत सब स्टेशन का कार्य समय-सीमा के पूर्व ही पूर्ण कर लिया गया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि, अस्थाई अस्पताल में भोजन व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था तथा हाउसकीपिंग सर्विस की बेहतर व्यवस्था हो।

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विभिन्न प्रोजेक्ट्स को समय-सीमा के पहले पूरा करने का रखें लक्ष्य

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अस्पताल तक के पहुँचमार्ग, डोम में कांक्रीट फ्लोर, पार्किंग एवं प्रशासकीय क्षेत्र में फ्लोरिंग, नाली एवं अन्य विविध कार्य, मेडिकल गैस पाईपलाईन सिस्टम, फैंसिंग सहित ऑक्सीजन बैकअप और 150 केएलडी के सेप्टिक/एसटीपी का कार्य शीघ्र पूर्ण करें। साथ ही डोम, एक अतिरिक्त डोम, डोम में विद्युत कार्य एवं टॉयलेट, आउटसोर्स स्टॉफ से संबंधित कार्य भी समय-सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखें।

उल्लेखनीय है कि बीना रिफ़ाइनरी द्वारा 2 बार (बीएआर) प्रेशर पर सप्लाई प्रारंभ की जाएगी, जिससे साधारण ऑक्सीजन अस्थायी अस्पताल के बिस्तरों के लिए पर्याप्त होगी। दुर्गापुर से लाए जा रहे 7 बार प्रेशर के कंप्रेशर को स्टेंडबाय प्रेशर के रूप में रखा जाएगा। साथ ही ऑक्सीजन सिलेंडर का इमरजेंसी बैकअप भी रखा जाएगा।

कलेक्टर श्री दीपक सिंह ने बताया कि, डोम स्ट्रक्चर तथा विद्युतीकरण का कार्य 25 मई तक पूर्ण कर लिया जाएगा। इसी प्रकार जल प्रदाय, सड़क एवं कांक्रीट फ्लोरिंग का कार्य 15 मई तक तथा 200 पॉइंट्स पर ऑक्सीजन पाइप लाइन का निर्माण समय-सीमा में पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि फ़र्नीचर तथा अन्य उपकरणों से संबंधित समस्त क्रय आदेश भी जारी किए जा चुके हैं।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री भूपेंद्र सिंह, राजस्व एवं परिवहन मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, सहकारिता मंत्री श्री अरविंद सिंह भदौरिया, सागर सांसद श्री राज बहादुर सिंह, विधायक श्री महेश राय, श्री गौरव सिरोटिया, पुलिस अधीक्षक श्री अतुल सिंह, अस्थायी अस्पताल के नोडल अधिकारी एवं अपर कलेक्टर श्री नरेंद्र सूर्यवंशी और भारत ओमान रिफाइनरी के वरिष्ठ अधिकारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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 How-to-get-Vaccination-Jab-कोविन-वेबसाइट-पर-स्व-पंजीयन-कर-के-करें-टीकाकरण-केंद्र-का-चयन


सागर वॉच  / 9 मई 2021@ जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. एस.आर..रोशन के मुताबिक  कि 18 वर्ष से ऊपर वाले युवाओं को सर्वप्रथम सेल्फ रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर जाये यहाँ रजिस्ट्रेशन का विकल्प होगा आपको अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और गेट-ओटीपी पर क्लिक करना होगा। आपके मोबाईल नंबर पर ओटीपी का मैसेज आएगा तत्काल वापस भेजते ही नया पेज खुलेगा यहाँ आपको अपनी व्यक्तिगत ब्यौरा  भरना  है कोई एक विकल्प चुनकर शासन द्वारा मान्य आईडी (आधार, पेन कार्ड, वोटर आई इत्यादि) नंबर डालना है फिर नाम, लिंग, जन्मतिथि भरनी होगी इसके बाद अपने नजदीकी कोविड वैक्सीनेशन सेंटर चुनने का विकल्प आयेगा सेंटर चुनने के बाद आप अपनी सुविधा अनुसार उपलब्ध स्लॉट चुन सकते है ।

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स्लॉट बुक होने पर आप टीकाकरण केन्द्र पर जाकर टीका लगवा सकते है स्लॉट निश्चित संख्या में बुक होने के बाद बंद हो जाता है असुविधा से बचे यदि आपका स्लॉट बुक हो गया है और आप ने टीका नहीं लगवाया तो आपको पुनः स्लॉट बुक करने की प्रक्रिया दोहराना होगी तत्पश्चात् टीका लगवा सकते है।

45 वर्ष से अधिक आयु के हितग्राही टीकाकरण केन्द्र पर टीका लगवाने हेतु आवश्यक दस्तावेजों के रूप में आधार कार्ड अथवा कोई भी शासकीय पहचान पत्र साथ लेकर अवश्य आयें । टीकाकरण सत्र स्थल पर भी पंजीयन करा सकते है। ऐसे वरिष्ठ नागरिक जो अपना पंजीयन स्वयं नहीं कर सकते वह जनसुविधा केन्द्र या कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर भी अपना पंजीयन करा सकते है ।


टीकाकरण केन्द्र जहाँ टीका लगाये जावेगे ग्रामीण क्षेत्रों में - 18 वर्ष से 44 वर्ष के हितग्राहियों का टीकाकरण स्थल सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बण्डा, शाहगढ़ एवं रहली ,सिविल अस्पताल खुरई, बीना ।

सागर शहरी क्षेत्र अंतर्गत 
  • पण्डित रविशंकर शुक्ल उ.मा.शाला मोतीनगर
  • एम.एल.बी. स्कूल क्रमांक 1 बस स्टेण्ड के पास, पुलिस लाईन सागर ।

45 वर्ष से अधिक आयु के हितग्राहियों का टीकाकरण निम्न स्थलों पर संचालित किया जावेगा - 

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रहली, बण्डा, देवरी, केसली, जैसीनगर, शाहगढ़, शाहपुर, राहतगढ़, मालथौन, सिविल अस्पताल खुरई, बीना ।

सागर शहरी क्षेत्र अंतर्गत 
  • एम.एल.बी.स्कूल क्रमांक 1 बस स्टेण्ड सागर, 

  • हुलासी राम मुखारया स्कूल सदर बाजार, 

  • आर्ट एण्ड कॉर्मस महाविद्यालय तहसीली, 

  • पीटीसी ग्राऊड पीली कोटी के नीचे ड्राईव रन कोविड वैक्सीनेशन सांय 4 बजे से 7 बजे तक स्वयं के वाहन मे ही वैक्सीनेशन होगा।

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कोविड-19 का टीका पूर्ण सुरक्षित है स्वयं लगवायें परिवार के सदस्यों को लगवायें अन्य परिचितों को प्रेरित कर कोविड-19 का टीका अवश्य लगवायें टीकाकरण केन्दों्र पर सोशल डिस्टेसिंग का पालन अवश्य करें कोरोना के संक्रमण से स्वयं बचे।

 टीकाकरण पश्चात 30 मिनिट वेटिंग रूम में अवश्यक रूकें टीका लगवाने के पूर्व कुछ खाकर अवश्य आये, साथ ही कोविड - 19 गाईड लाईन का पालन अवश्यक करें । मॉस्क पहने, हाँथ धोते रहें, अनावश्यक घर से बाहर न निकले, दो गज की दूरी अवश्यक बनाये रखें । 

शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में टीकाकरण की सुविधा निःशुल्क है । और अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1075 पर संपर्क कर सकते है।

DRDO-Developed-Covid-Medicine-नयी-दवा-मरीजों-को -बाहर-से-ऑक्सीजन-देने-की-निर्भरता-को-कम-करती-है

सागर वॉच @
 डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज (डीआरएल)हैदराबाद के सहयोग से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशाला इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (आईएनएमएएस) द्वारा दवा 2-डिऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) का एक एंटी-कोविड-19 चिकित्सकीय अनुप्रयोग विकसित किया गया है। नैदानिक परीक्षण परिणामों से पता चला है कि यह अणु अस्पताल में भर्ती रोगियों की तेजी से रिकवरी में मदद करता है एवं बाहर से ऑक्सीजन देने पर निर्भरता को कम करता है। अधिक मात्रा में कोविड रोगियों के 2-डीजी के साथ इलाज से उनमें आरटी-पीसीआर नकारात्मक रूपांतरण देखा गया। यह दवा कोविड-19 से पीड़ित लोगों के लिए काफी फायदेमंद होगी।

महामारी के विरुद्ध तैयारी के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान के सिलसिले में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 2-डीजी के एंटी-कोविड चिकित्सकीय अनुप्रयोग विकसित करने की पहल की। अप्रैल 2020 में महामारी की पहली लहर के दौरान,आईएनएमएएस-डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी),हैदराबाद की मदद से प्रयोगशाला परीक्षण किए और पाया कि यह दवा सार्स-सीओवी-वायरस के खिलाफ प्रभावी ढंग से काम करती है और वायरल बढ़ने को रोकती है। इन परिणामों के आधार पर ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने मई 2020 में कोविड-19 रोगियों में 2-डीजी के चरण-के नैदानिक परीक्षण की अनुमति दी।

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने अपने उद्योग सहयोगी डीआरएल हैदराबाद के साथ मिलकर कोविड-19 मरीजों में दवा की सुरक्षा और प्रभावकारिता का परीक्षण करने के लिए नैदानिक परीक्षण शुरू किए। मई से अक्टूबर 2020 के दौरान किए गए चरण- II परीक्षणों (डोज़ रेजिंग समेत) में दवा कोविड-19 रोगियों में सुरक्षित पाई गई और उनकी रिकवरी में महत्वपूर्ण सुधार दिखाया गया। दूसरे चरण का संचालन छह अस्पतालों में किया गया और देश भर के 11 अस्पतालों में फेज II बी (डोज रेजिंग) क्लीनिकल ट्रायल किया गया। फेज-में 110 मरीजों का ट्रायल किया गया।

प्रभावकारिता की प्रवृत्तियों में 2-डीजी के साथ इलाज किए गए रोगियों ने विभिन्न एंडपॉइंट्स पर स्टैंडर्ड ऑफ केयर (एसओसी) की तुलना में तेजी से रोगसूचक उपचार प्रदर्शित किया। इस उपचार के दौरान रोगी के शरीर में विशिष्ट महत्वपूर्ण संकेतों से संबंधित मापदंड सामान्य बनाने में लगने वाले औसत समय में स्टैंडर्ड ऑफ केयर (एसओसी) की तुलना में एक बढ़िया अंतर (2.5 दिन का अंतर) देखा गया।

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सफल परिणामों के आधार पर डीसीजीआई ने नवंबर 2020 में चरण-नैदानिक परीक्षणों की अनुमति दी। दिल्ली,उत्तर प्रदेश,पश्चिम बंगालगुजरातराजस्थानमहाराष्ट्रआंध्र प्रदेशतेलंगानाकर्नाटक और तमिलनाडु के 27 कोविड अस्पतालों में दिसंबर 2020 से मार्च 2021 के बीच 220 मरीजों पर फेज-क्लीनिकल ट्रायल किया गया। तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के विस्तृत आंकड़े डीसीजीआई को पेश किए गए। 2-डीजी के मामले में रोगियों के लक्षणों में काफी अधिक अनुपात में सुधार देखा गया और एसओसी की तुलना में तीसरे दिन तक रोगी पूरक ऑक्सीजन निर्भरता (42 प्रतिशतबनाम 31 प्रतिशतसे आज़ाद हो गए जो ऑक्सीजन थेरेपी/ निर्भरता से शीघ्र राहत का संकेत है।

इसी तरह का रुझान 65 साल से अधिक उम्र के मरीजों में देखा गया । दिनांक मई, 2021 को डीसीजीआई ने इस दवा के आपातकालीन उपयोग की गंभीर कोविड-19 रोगियों में सहायक चिकित्सा के रूप में अनुमति प्रदान की। ग्लूकोज का एक सामान्य अणु और एनालॉग होने के नाते इसे आसानी से उत्पादित किया जा सकता है और देश में अधिक मात्रा में उपलब्ध कराया जा सकता है।

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एक सैशे में पाउडर के रूप में यह दवा आती है जिसे पानी में घोलकर लिया जाता है। यह वायरस संक्रमित कोशिकाओं में जमा होती है और वायरल संश्लेषण और ऊर्जा उत्पादन को रोककर वायरस के विकास को रोकती है। वायरस से संक्रमित कोशिकाओं में इसका चयनात्मक संचय इस दवा को बेजोड़ बनाता है।

वर्तमान में जारी दूसरी कोविड-19 लहर में बड़ी संख्या में मरीज गंभीर ऑक्सीजन निर्भरता का सामना कर रहे हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत है। संक्रमित कोशिकाओं में दवा के प्रभाव करने के तरीक़े के कारण इस दवा से बहुमूल्य जीवन बचाने की उम्मीद है। इससे कोविड-19मरीजों के लिए अस्पताल में बिताए जाने वाले दिनों की संख्या भी कम हो जाती है।

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