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Cyber Crime Reporting Portal-साइबर अपराधों की शिकायतों के लिए ने पोर्टल शुरू

सागर वॉच/ 
गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा साइबर अपराधों से व्यापक तरीके से निपटने के लिए एक प्रभावी तंत्र उपलब्ध कराने के उद्देश्य से “भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी)” योजना को कार्यान्वित किया है। इसके अंतर्गत सभी प्रकार के साइबर अपराधों ,विशेषकर महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध साइबर अपराध की रिपोर्टिंग हेतु “राष्ट्रीय अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल‘‘ को लॉंच किया गया है। पोर्टल में दर्ज शिकायतें स्वचालित रूप से संबन्धित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र को ऑनलाइन अग्रेषित की जाती हैं।

  
देश में दिन प्रतिदिन लगातार बढ़ती ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की त्वरित रिपोर्टिंग के लिए गृह मंत्रालय द्वारा शिकायत दर्ज करने के लिए राष्ट्रीय टोल फ्री हेल्पलाईन नंबर 1930 शुरू किया गया है।
कलेक्टर श्री दीपक आर्य ने निर्देष दिए हैं कि “राष्ट्रीय अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल राष्ट्रीय टोल फ्री हेल्पलाईन नंबर 1930, टिवटर अकाउंट, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम के संबंध में क्षेत्रीय लोगों में तथा नगर पालिका और पंचायत क्षेत्रों में स्कूल/कॉलेज के विध्यार्थियों को जागरूक करने हेतु प्रचार-प्रसार एवं उन्हें प्रोत्साहित करने हेतु सकारात्मक कदम उठाए जाने की जरूरत  है।

PM HOUSING SCHEME-मप्र के 50 हजार से ज्यादा हितग्राहियों के प्रस्ताव केंद्र में मंजूरी के लिए अटके

 सागर वॉच। 19 मार्च 2022। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ने बताया है कि प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में 1 लाख 7 हजार 286 हितग्राहियों के आवास जल्द स्वीकृत होंगे।  आवास मंत्री  ने गत दिनों नई दिल्ली में आवास एवं शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी से भेंट कर उन्हें बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के बीएलसी घटक में हितग्राहियों द्वारा विशेष रूचि ली जा रही है। 


उन्होंने केंद्रीय आवास मंत्री को यह भी बताया कि फरवरी 2022 में 67 हजार 286 हितग्राहियों के प्रस्ताव केन्द्र में स्वीकृति के लिए विचाराधीन हैं। मार्च माह में भी 40 हजार हितग्राहियों ने बीएलसी घटक में आवास के लिये आवेदन किया है] जिनके प्रस्ताव भी भारत सरकार को भेजे जा रहे हैं। श्री पुरी ने अधिकारियों को मध्यप्रदेश के लंबित प्रस्तावों को जल्द स्वीकृत करने के निर्देश दिए हैं।


केन्द्र के तकनीकी सहयोग से प्रदूषण मुक्त होंगी नदियाँ 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ने राज्य की सभी नदियों एवं जल-स्रोतों को प्रदूषण से मुक्त रखने के लिये गंगा एक्शन प्लान या अन्य अनुभव के आधार पर मार्गदर्शन देने का आग्रह किया। श्री पुरी ने इस संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन देने के लिये एक टीम मध्यप्रदेश भेजने के निर्देश अधिकारियों को दिये।

मप्र-उप्र साझ करेंगे नगरीय विकास के अनुभव 

केंद्रीय आवास मंत्री ने उत्तर प्रदेश] मध्यप्रदेश एवं गुजरात के नगरीय विकास के अनुभवों को आपस में साझा करने के लिये एक फोरम (क्लास लर्निंग प्लेटफार्म) बनाने के सुझाव पर सहमति व्यक्त करते हुए जल्द कार्यवाही के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये।

मप्र के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में मिल रहे केन्द्र सरकार के लगातार सहयोग से प्रदेश ने योजना के क्रियान्वयन में देश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। वर्तमान में बीएलसी घटक में 6 लाख 28 हजार आवास स्वीकृत किये जा चुके हैं। सभी घटकों में मिलाकर अब तक 8 लाख 68 हजार आवास स्वीकृत हो चुके हैं।

Income Tax Raid-कोचिंग  संस्थान ने छात्रों से मिली २५ करोड़ से अधिक की राशि छिपाई
सागर वाच आयकर विभाग ने 25-11-2021 को इंदौर के दो प्रमुख व्यापारिक समूहों पर छापे
मारी व तलाशी-जब्ती अभियान शुरू किया। पहला समूह खनन, मीडिया और केबल टीवी सेवाएं प्रदान करने के व्यवसाय से जुड़ा है और दूसरा समूह एक कोचिंग अकादमी चला रहा है। मध्य प्रदेश में 70 और 5 अन्य राज्यों सहित 70 से अधिक परिसरों की तलाशी ली गई।

तलाशी की कार्रवाई के दौरानकुछ व्यवसायों के वित्तीय रिकॉर्ड के समानांतर सेट सहित विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए जिन्हें जब्त कर लिया गया है। इन साक्ष्यों के आरंभिक विश्लेषण से विभिन्न कदाचारोंविशेष रूप से खनन व्यवसाय में बिक्री की आयकर चोरी का पता चलता है।

केबल टीवी सेवा के कारोबार में भी इसी तरह बड़े पैमाने पर कर चोरी पाई गई है। अन्य कदाचार जैसे पैसों का भुगतानसंदिग्ध बेनामी लेनदेननकद में किए गए बेहिसाब खर्चअचल संपत्तियों में अघोषित निवेश आदि के साक्ष्य भी मिले हैं।

जांच से पता चला है कि समूह ने प्रविष्टि संचालक द्वारा प्रबंधित विभिन्न मुखौटा कंपनियों से फर्जी असुरक्षित कर्ज के रूप में 40 करोड़ रुपये से अधिक की आवास प्रविष्टियां भी प्राप्त की हैं। 

तलाशी अभियान के दौरान मुख्य प्रविष्टि संचालकमुख्य संचालक और मुखौटा कंपनियों के कई नकली निदेशकों की पहचान करउनसे पूछताछ कर ली गई है। 

नकली निदेशकों और प्रमुख संचालकों ने स्वीकार किया है कि कंपनियां केवल कागजी संस्थाएं हैं और वे मुख्य प्रविष्टि संचालक के इशारे पर काम कर रही हैं।

कोचिंग ग्रुप के तलाशी अभियान से मिले और जब्त किए गए दस्तावेजी साक्ष्य स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि छात्रों से नकदी के रूप में प्राप्त 25 करोड़ रुपये से अधिक की राशि छिपाई गई है। 

जब्त किए गए सबूतों के विश्लेषण से यह भी संकेत मिलता है कि यह समूह व्यवस्थित रूप से अपनी विभिन्न फ्रेंचाइजी से मिली रॉयल्टी और लाभ की हिस्सेदारी से हुई आय को छिपा रहा है। 

इन खातों में 10 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाब नकदी की रकम प्राप्त की गई है। तलाशी अभियान के दौरान दो करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद हुई है। जांच आगे जारी है।

 Kamdhenu-Study-and-Research-Centre -विवि छात्रों के हॉस्टल की ही तर्ज़ पर गायों के आश्रय भी बनाये

सागर वॉच  केन्द्रीय केबिनेट मंत्री, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार  परषोत्तम रूपाला ने कहा  विश्वविद्यालय को चाहिए कि छात्रों के हॉस्टल की ही तर्ज़ पर गायों के आश्रय के लिए भी एक बड़े केंद्र की स्थापना करे। उनका  मंत्रालय और वो स्वयं भी व्यक्तिगत तौर पर इसमें सहयोग करने को तैयार। 

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के राजमाता सिधिया स्वर्णजयंती सभागार में कामधेनु अध्ययन एवं शोध पीठ की स्थापना पर आयोजित  कार्यक्रम  में अपने उद्बोधन के दौरान उन्होंने ये विचार व्यक्त किये 

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि  गायों की क्षमता अपार है, जरूरत इसे समझने और समझाने की है। दुग्ध उत्पादन, खाद उत्पादन और विभिन्न औषधीय उपयोगों सहित गायों के महत्व को कई पहलुओं को हम बचपन से जानते हैं। दुर्भाग्य से, समय के साथ हम देशी गोवंश का महत्व भूल गए हैं।

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भारतीय परम्परा में समृद्धि की गणना गोधन से ही की जाती थी। यह एक पारंपरिक धन है जो हमें स्वाभाविक ढंग से चतुर्दिक समृद्धि की ओर ले जा सकता है। 

उन्होंने कहा कि गाय ब्रह्माण्ड का मूल आधार है जिससे संबंधित सभी उत्पाद मनुष्य के मनतन और धन को प्रखर कर देते हैं। इसलिए हमारा यह सौभाग्य है कि हमारे जीवन और समाज के सभी अनुष्ठानों में गाय की भूमिका और आशीर्वाद स्वाभाविक रूप से उपलब्ध है। यहाँ से यह संदेश जाना चाहिए कि हम अपने जीवन और कर्म में गौ-स्नेह को नये रूप में पुनर्स्थापित कर सकें। 

उन्होंने कहा कि गौवंशगौमूत्र आदि से होने वाली आय पर गौशाला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती है। आज के समय में ऐसे मॉडल को विकसित और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। कोरोना संकट की तमाम मुश्किलों के साथ इसने हमें यह सिखाया है कि स्वस्थ और सुरक्षित रहने के लिए हमें गौमाता की ही शरण में जाना होगा। 

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विश्वविद्यालय इस शरण को एक व्यापक क्रान्ति में बदल सकेऐसा प्रयत्न इसे करना चाहिए। इसके लिए विश्वविद्यालय कई आयामों एवं उद्देश्यों के प्रोजेक्ट और वित्त संबंधी प्रस्तावों को मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत करे। मंत्रालय निश्चित रूप से इस योजना में विश्वविद्यालय की मदद करेगा। 

कार्यक्रम से पूर्व  विश्वविद्यालय  में कामधेनु अध्ययन और अनुसंधान केंद्र स्थापित करने के लिए विश्वविद्यालय ने मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए है। 

कामधेनु पीठ वोकल फॉर लोकलका मूर्तिमान स्वरूप है : प्रो. नीलिमा गुप्ता

कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने स्वागत वक्तव्य देते हुए अतिथियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और पीठ स्थापित करने में मंत्रालय के सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह एक गौरवशाली एवं ऐतिहासिक क्षण है जहाँ विश्वविद्यालय अपने अकादमिक सरोकारों के अतिरिक्त सामुदायिक सेवा की अपनी प्रतिबद्धता को संस्थानीकरण करते हुए मूर्त रूप देने जा रहा है। मुझे हर्ष है कि हमारी इस पहल को माननीय केन्द्रीय मंत्री के नेतृत्व में उनके सम्पूर्ण विभाग ने तत्परता और प्राथमिकता के साथ स्वीकार किया।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की यह नवाचारी पहल वोकल फॉर लोकलसे अनुप्राणित है। यह एक ऐसा रास्ता है जिससे न केवल विश्वविद्यालय बल्कि समाज और राष्ट्र भी आत्मनिर्भर बनने को वास्तविक अर्थों में साकार कर सकेंगे। 

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21 वीं सदी की पहली राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसके लिए हमें न सिर्फ मार्ग सुझाती है बल्कि संरचना और अवसर भी उपलब्ध कराती हैजहाँ हम इस समुदाय आधारित ज्ञान एवं विज्ञान की ऐतिहासिक समृद्धि को पुनः समझें। 

यह भी एक सुखद संयोग है कि डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, मध्यप्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है और मध्यप्रदेश के पहले कामधेनु अध्ययन एवं शोध पीठ’ की स्थापना भी इसी विश्वविद्यालय में हो रही है। यह एक ऐसा मणिकांचन योग है जिसकी अनुगूँज बहुत दूर तक जायेगी। 

उन्होंने कहा कि गौ-संवर्धन के क्षेत्र में मंत्रालय की विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं को इस पीठ के माध्यम से हमारा विश्वविद्यालय अपने स्तर पर क्रियान्वित कर एक व्यापक सामुदायिक क्रांति में बदलने के लिए संकल्पित है। 

इसके लिए हमारे पास आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से युक्त प्रयोगशालाएँ हैं तो वहीं स्थानीय स्तर पर दयोदय गौशाला जैसा श्रेष्ठ उदाहरण मौजूद हैं। उनके अनुभवों से हमें इस दिशा में कुछ ठोस और श्रेष्ठ करने में सहायता मिलेगी।

विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. वल्लभभाई कथीरिया ने कहा कि यह एक सुअवसर है कि गौ आधारित अर्थव्यवस्था की शुरुआत हो रही है। एक समय में माननीय मालवीय जी ने विश्वविद्यालय में गौशाला स्थापित करने की शुरुआत की थी। 

आज भी यह काम विश्वविद्यालय के माध्यम से किया जा रहा है। यह एक महान काम है। आज पूरे विश्व में पैराडाइम शिफ्ट हो रहा है। विश्व के फलक पर भारतीय संस्कृति अपना विस्तार कर रही है। यह पर्यावरण फ्रेंडली की दिशा में बढ़ाया गया एक कदम भी है। गौ संवर्धन की दिशा में आज एक नया अध्याय जुड़ रहा है.

कामधेनु पीठ बनेगा देश के लिए प्रतिमान : महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानन्द गिरी

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गोपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्डमध्य प्रदेश शासन के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानन्द गिरी ने कहा कि मध्य प्रदेश सर्वाधिक गौ प्रेमी और गौ सेवकों का प्रदेश है। मध्य प्रदेश गौ-संवर्धन आयोग के साथ मिलकर डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में विश्व की सबसे बड़ी गौशाला स्थापित की जा सकती है। कामधेनु पीठ इस अर्थ में एक शुभ कदम है। मैं विश्वास करता हूँ कि यह पीठ देश का एक प्रतिमान बने जहां गौधन संवर्धन के लिए वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन-अध्यापन हो सकेगा। आने वाला समय पंच- गव्य की आर्थिकी का है जिसके द्वारा हमारा समाज आत्मनिर्भर बन सकेगा. मध्य प्रदेश गौ संवर्धन आयोग इसके लिए विश्वविद्यालय को हर संभव मदद देने का आश्वासन देता है।

कामधेनु शोध पीठ स्थापित होना एक सांस्कृतिक घटना: कुलाधिपति

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो.बलवंतराय शांतीलाल जानी ने कहा कि यह शोध पीठ स्थापित होना एक सांस्कृतिक परिघटना है। यह नए भारत का निदर्शन है कि एक मंत्रालय का पूरा अमला अपने मुखिया के साथ एक विश्वविद्यालय में उपस्थित है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति का सुफल है कि संस्थाओं के साथ-साथ लोगों के बीच भी इस तरह के नवाचारी विचार पनप रहे हैं जो भारतीयता एवं राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत है। परम वैभवशाली राष्ट्र निर्माण की राह गौ-माता के प्रति हमारी आस्था से होकर जाती है। हमें ख़ुशी है कि विश्यविद्यालय इस राह का अन्वेषक बन रहा है।

सागर लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजबहादुर सिंह ने कहा कि पीठ स्थापना के लिए आज हुए समझौता ज्ञापन के लिए विश्वविद्यालय को बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूँ। उन्होंने भारत सरकार को इस पुनीत कार्य के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि गाय का महत्व बढ़ाने के लिए बहुत ही सुयोग्य विश्वविद्यालय का चयन किया गया है जिस गाय को हम भगवान का दर्जा देते हैं, मुझे विश्वास है उसके लिए यह पीठ बेहतर कार्य कर सकेगी।

सागर विधानसभा क्षेत्र के विधायक शैलेन्द्र जैन ने कहा कि विश्वविद्यालय में कामधेनु पीठ की स्थापना गौवंश के संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी अकादमिक पहल है। इससे बुंदेलखंड में पारंपरिक रूप से गौवंश के रूप में विद्यमान ज्ञान को प्रयोगात्मक और सैद्धांतिक स्तर पर सब तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर कार्यक्रम की नोडल अधिकारी प्रो. अर्चना पाण्डेय ने कामधेनु पीठ के उद्देश्यों एवं भविष्य की योजनाओं की प्रस्तुति देते हुए बताया कि यह पीठ सागर सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों और समग्रता में बुंदेलखंड के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा जिसमें वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन और पशुधन संरक्षण के तौर-तरीकोंगौ पालन के प्रति उच्च शिक्षा से जुड़े हुए युवाओं को आकर्षित करने और शिक्षित करनेप्रकृति और प्राकृतिक चीजों के प्रति लोगों को संजीदा बनाने जैसे व्यापक उद्देश्य के साथ कार्य करते हुए पंचगव्यगोबरगौमूत्र आदि पर अनुसंधान किया जाएगा। 

 मंत्रालय और विश्वविद्यालय के बीच हुआ एमओयू

इस अवसर पर मत्स्य पालनपशुपालन एवं डेयरी मंत्रालयभारत सरकार एवं विश्वविद्यालय के बीच एमओयू भी हुआ। कामधेनु पीठ द्वारा संचालित की जाने वाली गतिविधियों के संबंध में मंत्रालय और विश्वविद्यालय की भूमिका को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने और मंत्रालय प्रतिनिधि संयुक्त सचिव ओ. पी. चौधरी ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।  

कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशुतोष ने किया। कुलसचिव संतोष सोहगौरा ने मंचासीन अतिथियों सहित कार्यक्रम में पधारे लोगों का आभार व्यक्त किया। डॉ राकेश सोनी के नेतृत्व में विद्यार्थियों द्वारा बरेदी नृत्य की प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में सागर के सम्माननीय जनप्रतिनिधिनागरिकगणमीडियाकर्मी और विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त और सेवारत शिक्षकअधिकारीकर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।        

महर्षि पतंजलि भवन का हुआ लोकार्पण

विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयन्ती सभागार के पीछे स्थित महर्षि पतंजलि भवन का लोकार्पण भी हुआ। इस अवसर पर कामधेनु पीठ स्थापना कार्यक्रम में पधारे गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में भवन का लोकार्पण कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर योग विभाग के विद्यार्थियों ने योग मुद्राओं का प्रदर्शन किया। वर्तमान में इस भवन में प्रबंधन अध्ययन विभागयोग विभाग और संगीत विभाग संचालित हैं।

 Get-Covid-Certificate-On -WhatsAp-अब-व्हाट्सअप  -पर-भी-मिलेगा-कोविड-टीकाकरण-का-प्रमाण-पत्र



सागर वॉच।   
अब तक कोविड टीकाकरण के बाद उसका प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए लोगों को कोविन की  वेबसाइट पर जाकर लॉग इन करना पड़ता था । फिर प्राप्त हुए  ओटीपी को भरना पड़ता था उसके बाद ही प्रमाण पत्र डाउनलोड करना पाते थे । यह प्रक्रिया इन्टरनेट का ज्यादा ज्ञान नहीं रखने वालों के लिए मुश्किल लगती थी। केंद्रीय स्वस्थ्य मंत्रालय ने    हाल ही में आम लोगों की  इस समस्या का  समाधान कर दिया है । अब लोगों को टीकाकरण का प्रमाण पत्र व्हाट्स अप पर ही मिल जायेगा ।Get-Covid-Certificate-On -WhatsAp-अब-व्हाट्सअप  -पर-भी-मिलेगा-कोविड-टीकाकरण-का-प्रमाण-पत्र

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केंद्रीय स्वास्थय  मंत्री  मनसुख मंडाविया  ने बताया कि अब वाट्स अप के जरिये कुछ ही पलों में आपको टीकाकरण का प्रमाण पत्र मिल जायेगा । रविवार 8 अगस्त से इसकी शुरुआत भी हो गयी है । व्हाट्स अप पर टीकाकरण का प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए छोटी से प्रक्रिया है । पहले अपने मोबाइल में  यह मोबाइल नम्बर -9013151515 को कोविड  सर्टिफिकेट के नाम से  सेव कर ले । उसके बाद व्हाट्स के सन्देश  लिखने की जगह पर अंग्रेजी में  - COVID CERTIFICATE - लिख कर कोविड सर्टिफिकेट नाम से दर्ज किये नंबर पर भेज दें । इसके तुरंत बाद आपके टीकाकरण के लिए आपके द्वारा दर्ज कराये मोबाइल नंबर पर ओटीपी आयेगा । उसे व्हाट्स अप के सन्देश बॉक्स में टाइप कर भेज दें ।

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ओटीपी भेजते है आपको व्हाट्स अप पर सन्देश मिलेगा कि टीकाकरण प्रमाणपत्र डाउनलोड करने के लिए सन्देश बॉक्स में 1 टाइप कर भेजें । इसके तुरंत बाद आपको टीकाकरण प्रमाणपत्र की पीडीऍफ़ लिंक आ जाएगी । उस परक्लिक करते ही आपका टीकाकरण प्रमाणपत्र खुल जायेगा ।

इसी क्रम में अगर आप व्हाट्स सन्देश बॉक्स में Menu लिख कर भेज देंगे तो आपको कोविड सम्बन्धी कई प्रकार की जानकारी हासिल करने की विकल्प प्राप्त हो जायेंगे । आप  जैसे ही पसंदीदा विकल्प के पहले लिखे उसके  क्रम का   नंबर सन्देश बॉक्स में  लिखकर वापस भेजेंगे । आपको तुरंत चाही गयी जानकारी मिल जाएगी 

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सागर वॉच @ 
भारत सरकार द्वारा कोविशील्ड वैक्शीन की दो खुराकों के बीच के अंतराल बढ़ाने पर सहमति देते ही देश में सरकार के इस फैसले के खिलाफ सवालों की झड़ी लग गयी है। सरकार के विरोधी भी काफी मुखर होकर सवाल कर रहे हैं कहीं यह फैसला पर्याप्त वैक्सीन नहीं होने की वजह से तो नहीं उठाया गया है ?  जब फरवरी में ही  यह अध्ययन  प्रकाशित हो चुका  था  कि 12 हफ्ते से ज्यादा अंतर पर वैक्सीन की कारगरता और बेहतर हो रही है तो उसी वक्त यह फैसला क्यों नहीं लिया गया? देरी क्यों की गई ?

सरकार ने कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच अंतर को 6-8 हफ्ते से बढ़ाकर 12-16 हफ्ते करने की विशेषज्ञ समिति की सिफारिश को मान लिया है। अंतर बढ़ाने के फैसले का ऐलान करते हुए नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने कहा कि यह फैसला वैज्ञानिक तथ्यों और वास्तविक जिंदगी के अनुभवों के के आधार पर किया गया है। 

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अंग्रेजी न्यूज चैनल  को  इन्हीं सवालों  के जवाब में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने बताया कि दो खुराकों के बीच अंतराल बढ़ाने के फैसले के लिए उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर व्यावहारिक बताया है। उन्होंने कहा, आंकड़ें बताते हैं कि 12 हफ्ते से ज्यादा का अंतराल कारगर है। लेकिन इसके लिए रेंज होना चाहिए जैसे 12 से 14 हफ्ते या 12 से 16 हफ्ते। क्योंकि सभी को 12 हफ्ते में ही दूसरी खुराक लग जाएगी, ऐसा नहीं है इसलिए रेंज होना चाहिए। समिति ने आंकड़ों का विश्लेषण  करके 16 हफ्ते तक का रेंज तय किया। यह उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर भी यह व्यावहारिक है और आपूर्ति तंत्र व सुरक्षा के लिहाज से भी व्यावहारिक है।

जब फरवरी में ही  यह बात सामने आ गई थी कि 12 हफ्ते से ज्यादा अंतराल के नतीजे अच्छे मिल रहे हैं तो भारत में तभी यह फैसला क्यों नहीं किया गया, इस सवाल पर डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि तब समिति के सदस्यों में आम सहमति नहीं बन पाई थी। उन्होंने कहा, इस  साल की शुरुआत में यह बात सामने आई थी कि अंतर बढ़ने से वैक्सीन और ज्यादा असरदार हो रही है। लेकिन बाद में कनाडा और दूसरे देशों से और ज्यादा आंकडे़ सामने आए। 

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फरवरी में लैंसेंट का लेख प्रकाशित हुआ। समिति में उस पर चर्चा हुई थी लेकिन कोई आम सहमति नहीं बन पाई कि अंतराल को 12 हफ्ते से ऊपर किया जाए। अगर उस वक्त ही अंतराल को 12 हफ्ते से ज्यादा कर दिया गया होता तो आज जो आलोचक देरी पर सवाल उठा रहे हैं, वही तब कहते कि यह क्यों किया गया, और अधिक आंकड़ों का इंतजार क्यों नहीं किया गया।

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टिट्यूट के चेयरमैन डॉक्टर अशोक सेठ ने भी कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच अंतराल बढ़ाने के फैसले को सही ठहराया है। डॉक्टर सेठ ने कहा कि यह एक सही रणनीति है, वैज्ञानिक आधार पर है। फरवरी में ही यह आंकड़ा उपलब्ध था और तब डब्लूएचओ ने कहा था 12 हफ्ते का अंतराल रखना चाहिए। यूनाइटेड किंगडम  ने तब इस सलाह को अपनाया था। लेकिन तब भारत ने अंतर को यह कहकर इतना नहीं बढ़ाया था कि वह आंकड़ों से आश्वस्त नहीं है। और ज्यादा भरोसेमंद आंकड़ों का इंतजार करना सही था।

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डॉक्टर अशोक सेठ ने एकल खुराक की अहमियत को भी बताया कि किस तरह वह संक्रमण कम करने और मौतों को रोकने में कारगर है। उन्होंने कहा, आंकड़े  बता रहे हैं कि 12 हफ्ते से ज्यादा अंतराल पर कारगरता बेहतर हो रही है। एकल खुराक से भी बेहतर प्रतिरोधकता बन रही है।

 वैक्सीन की सिर्फ एक खुराक ही 3 महीने तक संक्रमण  रोकती है। उसकी कारगरता 60-65 प्रतिशत है। एक खुराक से ही संक्रमण फैलाने का खतरा 50 प्रतिशत कम हो रहा है और मौत की गुंजाइश 80 प्रतिशत कम हो रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में हमें अधिक से अधिक आबादी को जितना जल्दी संभव हो सके वैक्सीन लगाना होगी ।

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Gazette-Notification- दिव्यांगता-प्रमाण-एक-जून-से-यूआईडी-पोर्टल-से-ही-जारी-होंगे

सागर वॉच @
 भारत सरकार के दिव्यांगजन अधिकारिता विभाग ने 05 मई को गजट अधिसूचना  जारी करके सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक जून  से ऑनलाइन मोड में ''दिव्यांगजनों के लिए विशिष्ट पहचान पत्र''
(UDID) पोर्टल के माध्यम से दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करना अनिवार्य कर दिया है। 

केंद्र सरकार ने 15.06.2017 को आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम, 2016 के अंतर्गत दिव्यांगजन अधिकार नियम, 2017 को अधिसूचित किया। नियम 18(5) केंद्र सरकार को ऑनलाइन मोड में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करना अनिवार्य बनाने के लिए तिथि निर्धारित करने का अधिकार प्रदान करता है। 


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केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय परामर्श बोर्ड ने 26 नवम्बर .2020 को अपनी अंतिम बैठक में इस विषय पर विचार किया और 01 अप्रैल .2021 से ऑनलाइन दिव्यांगता प्रमाणीकरण को अनिवार्य बनाने की सिफारिश की। लेकिन मार्च-अप्रैल 2021 के दौरान कुछ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव को देखते हुए ऑनलाइन प्रमाणीकरण को अब 01जून 2021 से अनिवार्य कर दिया गया है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य तथा दिव्यांगता मामलों से जुड़े विभागों को इस अधिसूचना के परिपालन को सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र कदम उठाने की सलाह दी गई है।   

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''दिव्यांगजनों के लिए विशिष्ट पहचान पत्र'' (UDID) परियोजना 2016 से लागू है। सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को यूडीआईडी पोर्टल  पर काम करने के लिए दिव्यांगजन विभाग द्वारा प्रशिक्षण दिया गया है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को ऑनलाइन मोड में बदलने के लिए पर्याप्त समय दिया गया है। इससे दिव्यांगता प्रमाणीकरण का संपूर्ण डिजिटीकरण सुनिश्चित होगा। इसके अतिरिक्त संपूर्ण भारत वैधता प्राप्त करने के लिए प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता की दोबारा जांच तथा दिव्यांगजन के लाभ के लिए प्रक्रिया की ठोस व्यवस्था हो सकेगी।

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Congratulation-सागर-ने-जीता-दीनदयाल-उपाध्याय-पंचायत-सशक्तीकरण-पुरस्कार

सागर वॉच @
प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी  ने  देशभर से  उत्कृष्ट  पंचायतों  की प्रतिस्पर्धा में  भाग लेने वालीं  74000 पंचायतों  में  से  पुरस्कार के लिए चुनी गयीं 313 पंचायतों  को   पुरस्कार  कि राशि  वर्चुअल  बटन दबाकर ट्रांसफर की।  

इसी  प्रतिस्पर्धा में सागर    जिला पंचायत को उत्कृष्ट कार्य हेतु पं. दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरूस्कार के साथ 50 लाख की राशि सीधे  प्राप्त हुयी । 

पुरूस्कार प्राप्त करने के लिये सागर जिला मुख्यालय पर जिला पंचायत की अध्यक्ष  दिव्या अशोक सिंह बामोरा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डाॅ. इच्छित गढ़पाले , अशोक  सिंह बामोरा,   जय गुप्ता जिला तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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 गौरतलब है कि पंचायतीराज दिवस 24 अप्रैल को भारत सरकार द्वारा 5 श्रेणियों में पुरूस्कार ग्राम पंचायतों, जिला पंचायतों को प्रोत्साहन हेतु प्रतिवर्ष दिये जाते है। जिसमें पं. दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरूस्कार, जीपीडीपी पुरूस्कार, बाल हितैषी पंचायत पुरूस्कारी, नानाजी देशमुख पंचायत सशक्तिकरण पुरूस्कारी, ई पंचायत पुरूस्कार की ये पांच श्रेणियों में उनके कार्यो के मूल्यांकन के आधार पर होता है।

वर्चुअल कार्यक्रम में केन्द्रीय पंचायतीराज मंत्री  नरेन्द्र सिंह तोमर, माननीय मुख्यमंत्री म.प्र. शासन एवं समस्त राज्यों के माननीय मुख्यमंत्री की मौजूदगी में संपन्न हुआ। कार्यक्रम संपूर्ण भारत से लगभग 5 करोड़ लोगों ने ऑनलाइन देखा। पुरूस्कार प्राप्त होने परं कलेक्टर  दीपक सिंह जिला पंचायत की अध्यक्ष  दिव्या अशोक  सिंह एवं मुख्य कार्यपालन अधिकरी जिला पंचायत डाॅ. इच्छित गढ़पाले द्वारा पंचायतीराज के जिले के समस्त जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारी कर्मचारियों को दी बधाई।

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