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Press Conference- प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने को चलेगा भूमि सुपोषण अभियान

सागर वॉच।
मध्य प्रदेश में किसानों को जैविक खेती के प्रति प्रेरित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा द्वारा भूमि सुपोषण अभियान-चलो खेत की ओर चलाया जा रहा है। जिसके माध्यम से किसान मोर्चा 75000 किसानों को तैयार कर 75000 हजार एकड़ भूमि में प्राकृतिक कृषि करवाएगा। यह बात दर्शन सिंह चौधरी प्रदेश अध्यक्ष किसान मोर्चा ने सागर में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही


श्री चौधरी ने कहा कि इस जनजागरण अभियान के माध्यम से किसान मोर्चा केंद्र व राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों को प्रत्येक किसान तक पहुंचाएगी व इस अभियान के माध्यम से 25 लाख नए कार्यकर्ता जोड़कर संगठन को मजबूत करेंगे साथ ही किसान मोर्चा आगामी चुनाव में मध्यप्रदेश में पुनःभाजपा की सरकार बनाने में महत्ती भूमिका निभाएगा।

श्री चौधरी ने का कहा कि पूर्व में कांग्रेस सरकारों की गलत नीतियों के कारण खेती व पशुपालन में किसानों को नुकसान हुआ जिस कारण उनका खेती व पशुपालन से मोहभंग हुआ हो रहा था परंतु भाजपा की केंद्र व राज्य सरकार सरकार किसानों की आय को दोगुना करने लिए प्रतिबद्ध हैं एवं निरन्तर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों की लागत मूल्य को कम कर, फसल की उपज का वाजिब मूल्य किसानों को मिल सकें

इस ओर निरंतर विदेश नीतियों में भी परिवर्तन कर, दशकों पुरानी नीतियों के दुराभाव से किसानों को बाहर निकालने व वर्तमान समय मे किसानों की दशा और दिशा को बेहतर बनाने के लिए कार्य कर रही हैं जिसका परिणाम है कि आज का  युवा नई–नई तकनीक के साथ पुनःखेती की ओर आकर्षित हो रहा है एवं कृषि के क्षेत्र में नित्य नवाचारों के माध्यम से नए नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा हैं।

पत्रकार वार्ता का संचालन जिला मीडिया प्रभारी श्रीकांत जैन ने एवं आभार आलोक केशरवानी ने व्यक्त किया। पत्रकार वार्ता में जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत,किसान मोर्चा प्रदेश मीडिया प्रभारी विवेक अहिरवार, सागर संभाग प्रभारी श्रीमती नर्मदा सिंह किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष धीरज सिंह ओरिया, पार्षद शैलेंद्र ठाकुर पूर्व प्रदेश मंत्री शिवराज सिंह बेरखेड़ी जी उपस्थित रहें।

Kharif Season-किसानों की सुविधा के लिए समिति से किया ज रहा है खाद वितरण

सागर वॉच/
कलेक्टर दीपक आर्य ने बताया कि किसानों को खाद उपलब्ध आसानी से हो इसके लिए जिला वितरण केंद्र की वितरण केंद्रों से एवं समितियों की वितरण केंद्र से खाद का वितरण कराया जा रहा है जहां पर समस्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई है।

किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किए गए जिसके तहत उनको समस्त खाद वितरण केंद्रों पर खाद प्राप्त करने के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई। जिसके तहत बैठने के लिए कुर्सी, पानी, पंडाल एवं चाय की व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई।

उन्होंने बताया कि कालाबाजारी रोकने के लिए राजस्व विभाग के अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं जिसकी चलते कालाबाजारी करने वालों पर पुलिस कार्रवाई की गई है एवं उर्वरक को जब्त  किया गया है उन्होंने बताया कि किसान भाइयों को सुविधा से खाद उपलब्ध हो इसके लिए समस्त निजी वितरण केंद्रों पर पटवारियों एवं तहसीलदारों की नियुक्ति कर निगरानी की जा रही है।

कलेक्टर दीपक ने बताया कि गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष यूरिया डीएपी एनपीके का दुगुना वितरण 14 नवम्बर तक किया जा चुका है उन्होंने बताया कि 2021 में 31 मार्च 2021 तक 34000 मेट्रिक टन यूरिया 26500 मेट्रिक टन डीएपी एवं 1990 टन एनपीके की विक्रय किया गया था, जबकि इस वर्ष 1 अक्टूबर 22 से 15 अक्टूबर 2022 तक 16245 मेट्रिक टन यूरिया 18927 मेट्रिक टन डीएपी एवं 4204 में मेट्रिक एनपीके का विक्रय किया जा चुका है।

कलेक्टर श्री आर्य ने बताया कि विगत वर्ष 1 अक्टूबर 2021 से 15 अक्टूबर 2021 तक 11000 मेट्रिक टन यूरिया 11358 मेट्रिक एनडीएपी एवं 5469 मेट्रिक टन एनपीके का वितरण किया गया था। कलेक्टर श्री आर्य ने बताया कि 2022 में 40000 मेट्रिक यूरिया 30,000 मेट्रिक टन डीएपी एवं 5000 में मेट्रिक एनपीके की मांग है उन्होंने बताया कि इसी वर्ष सितंबर माह में अग्रिम भंडारण के रूप में 5838 मेट्रिक टन डीएपी का वितरण भी किया गया है।


Rabi Crop Procurement-उपार्जन केंद्रों का भौतिक सत्यापन अधिकारी स्वयं करेंगे

सागर वॉच/15 मार्च 2022/ 
एसडीएम, तहसीलदार एवं जेएसओ उपार्जन केंद्रों का भौतिक सत्यापन करें एवं समस्त रबी उपार्जन केंद्र पर भंडारण, परिवहन, बारदाने सहित समस्त अन्य मूलभूत व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। उक्त निर्देश कलेक्टर ने जिला उपार्जन समिति की बैठक में दिए ।


बैठक में  डिफ्टी कलेक्टर सुश्री शशि मिश्रा, जिला खाद्य अधिकारी राजेंद्र बायकर,  पीके परोहा,  पीएल कावड़कर, डीसी राय, समस्त ट्रांसपोर्टर सहित अन्य समिति के सदस्य मौजूद थे।

कलेक्टर ने बताया  कि इसी प्रकार उपार्जित फसल के भुगतान की राशि सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित होगी। इसके लिए उनको अपने अपने बैंक खातों में आधार नंबर लिंक कराना अनिवार्य होगा।

 
उन्होंने बताया कि परिवर्तित व्यवस्था में फसल बेचने के लिए किसान, निर्धारित पोर्टल से नजदीक के उपार्जन केन्द्र, तिथि और समय खंड  का स्वयं चयन कर सकेंगे। उपार्जन केन्द्र, तिथि और समय खंड का चयन नियत तिथि के पूर्व करना अनिवार्य होगा। सामान्य तौर पर उपार्जन प्रारंभ होने की तिथि से एक सप्ताह पूर्व तक उपार्जन केन्द्र तिथि और समय खंड का चयन किया जा सकेगा।

अब किसानों को उपार्जित फसल का भुगतान उनके आधार नंबर से लिंक खाते में सीधे प्राप्त होगा, इससे बैंक खाता नंबर और आईएफएससी कोड की प्रविष्टि में त्रुटि से भुगतान में होने वाली असुविधा समाप्त हो जाएगी।

नवीन पंजीयन व्यवस्था में बेहतर सेवा प्राप्त करने के लिए यह जरूरी होगा कि किसान अपने आधार नंबर से बैंक खाता और मोबाईल नंबर को लिंक कराकर उसे अद्यतन रखे। इस संबंध में किसानों को जागरूक करने के लिए पर्याप्त प्रचार-प्रसार किया जाए। जिले की तहसीलों में संचालित आधार पंजीयन केन्द्रों पर किसान अपना मोबाईल नंबर अद्यतन करा सकते है एवं डाक घर में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है।

आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय किया जायेगा। ताकि किसान का बैंक खाता आसानी से उसके आधार नंबर से लिंक करा सकें। डाटा संशोधन एवं पंजीयन सत्यापन, भूमि स्वामी पंजीयन की प्रक्रिया,  पंजीयन के लिए निर्धारित एप्लीकेशन को वेबसाइट के माध्कयम से उपयोग करे। गिरदावरी किसान एप को एन्ड्रायड बेस्ड मोबाइल पर गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकेगा।

   किसान द्वारा दर्ज कराए गए नाम एवं भू-अभिलेख डाटा में दर्ज नाम का मिलान पंजीयन केन्द्र के कम्प्यूटर आपरेटर द्वारा किया जाकर पोर्टल पर प्रविष्टि की जाएगी।

गिरदावरी में खसरों पर दर्ज फसल एवं बोए गए सिंचित/असिचित रकबे का पंजीयन किया जा सकेगा। इसके उपरांत किसान को अपने सही आधार नंबर प्रविष्ट करना होगा। आधार प्रविष्टि के उपरांत यूआईडीएआई से पंजीकृत एवं आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर पर एसएमएस प्राप्त होगा, जिसके माध्यम से सत्यापन उपरांत आधार डाटाबेस में किसान की दर्ज पूर्ण जानकारी यूआईडीएआई से उपार्जन पोर्टल पर प्राप्त होगी।

      कलेक्टर ने निर्देश दिए कि समस्त उपार्जन केंद्रों पर 25 मार्च के पूर्व बारदाना सहित अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जावे और इसका भौतिक सत्यापन समस्त विभागीय अधिकारी तहसीलदार सहित अन्य वरीय अधिकारी कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। उन्होंने निर्देश दिए कि परिवहन भी समय पर हो और वेयर हाउस में सर्वेक्षक का मोबाइल नंबर, भण्डार गृह के बाहर चस्पा करें ।

RABI CROP-आगामी रबी विपणन वर्ष के लिए पंजीयन10 मार्च तक

NEWS IN SHORT
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 ख़बरें संक्षेप में 

सागर वॉच / 6 मार्च 2022/

↺ किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन ने गेहूँ की खरीदी के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 5 मार्च से  बढाकर 10 मार्च कर दी है। कलेक्टर  ने  किसानों  सभी से अनुरोध किया है कि वे  रबी विपणन वर्ष 2022-23 के लिए अपना पंजीयन नजदीकी पंजीयन केन्द्र पर उपस्थित होकर करवा लें ।

किसानों के पंजीयन के दौरान आधार लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाएगा। इस ओटीपी नंबर को पंजीयनकर्ता को देने से संबंधित किसान की का पंजीयन आसानी से हो जाएगा। साथ ही जिन किसानों का मोबाइल आधार से लिंक नहीं है, वे नजदीकी सेवा सहकारी समितियों पर बनाए गए पंजीयन केंद्र पर उपलब्ध बायोमेट्रिक डिवाइस से आधार सत्यापित कराने के बाद पंजीयन करा सकते है।

व्यवसायिक खेती के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण 9 मार्च से  

↺ आत्म निर्भर मप्र की दिशा में उद्यमिता विकास केन्द्र (सेडमैप) द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने हेतु औषधीय एवं सुगंधीय पौधों की व्यवसायिक खेती एवं प्रक्रियाकरण पर आधारित ऑनलाइन प्रशिक्षण  9 से 11 मार्च, दोपहर एक से 4 बजे तक दिया जाएगा।

प्रशिक्षण में औषधीय पौधे अश्वगंधा, सर्पगंधा, शतावर, सफेद मूसली, गिलोय, तुलसी, मोरिंगा, कोंच, पपीता तथा सुगंधीय पौधे लेमन ग्रास, पामारोजा, सिट्रोनेला, मेन्था, खस आदि की कृषि तकनीक, प्राथमिक प्रसंस्कण, उद्योग और बीजों, प्लाटिंग मटेरियल के प्राप्ति स्थलों तथा मार्केटिंग हेतु संभावित बाजार की जानकारी दी जाएगी। 

साथ ही होम हर्बल गार्डन स्थापना व घरेलू जड़ी बूटियों के गुणों एवं उपचार आदि के संबंध में विस्तित रूप से जानकारी दी जाएगी। किसान प्रषिक्षण हेतु सेडमैप के जिला समन्वयक एन.एस. तोमर के मो.नं. 8319656369 पर पंजीयन 8 मार्च तक करा सकते है।  

 

शासकीय सेवकों की ईएसएस प्रोफाईल अपडेट करना जरूरी

↺ आयुक्त कोष एवं लेखा द्वारा कोषालयीन सॉफटवेयर आईएफएमएसआई के अंतर्गत जिले के समस्त शासकीय सेवकों के ईएसएस प्रोफाईल में प्रविष्टि पूर्ण कर अपडेट किया जाना जरूरी है। जिले में विभिन्न विभागों द्वारा ईसीएस प्रोफाइल अपडेट नहीं किये जाने को कलेक्टर ने जिले के सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों से स्थिति को अत्यंत असंतोषजनक बताया । 

उन्होंने निर्देश दिये हैं कि सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारी अधीनस्थ सभी शासकीय सेवकों की ईएसएस प्रोफाईल अपडेट का कार्य अतिशीघ्र पूर्ण करें और कार्य पूर्णता का प्रमाण पत्र जिला कोषालय में प्रस्तुत करें। समस्त शासकीय सेवकों की ईएसएस प्रोफाईल अपडेट का कार्य पूर्ण नहीं करने पर संबंधित आहरण एवं सवितरण अधिकारी के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी। 


ग्राम गौरव दिवस पर 8 मार्च को 

↺ राज्य शासन ग्राम द्वारा 8 मार्च को सभी ग्रामों में ग्राम सभाओं में ”गौरव दिवस”  चरणबद्ध आयोजन किया जायेगा। ग्राम सभाओं के दौरान प्रत्येक ग्राम की एक सकारात्मक एक विशिष्ट पहचान स्थापित करने के संबंध में ग्रामीणों से चर्चा की जायेगी।

ग्राम के विकास और कल्याण के लिए सर्व भागीदारी से दूरगामी विकास और कल्याण की रणनीति तैयार करने के संबंध में, ग्रामों में पारस्परिक सृजनात्मक कला के पारस्परिक ज्ञान आदि का अभिलेखीकरण करना तथा उसमें विकास और बढोत्तरी करने के संबंध में व ग्राम के बाहर ग्राम की जिले, प्रदेश एवं राष्ट्र स्तर पर एक विशिष्ट पहचान स्थापित करने के सबंध में चर्चा होगी  

बिजली आपूर्ति बंद होने पर 1912 पर संपर्क करें


↺ ख़राब मौसम की शुरूआत में विद्युत आपूर्ति अवरूद्ध (लोकल फाल्ट) होने की घटना ज्यादा होती है। ऐसे में बिजली प्रणाली को दोष देने की बजाय उस दौरान उठाए गए कदमों को समझना चाहिए। दूसरी बात बिजली के खम्बों में बिजली प्रवाहित न हो, इसके लिए आपने चाकलेटी रंग या सफेद रंग के इंसूलेटर खम्बे में लगे देखे होंगे। बिजली आपूर्ति अवरूद्ध होने पर  बिजली कंपनी के टोल फ्री नंबर 1912 पर संपर्क किया जा सकता है।

 गर्मी के मौसम में ऐसे घटाएँ बिजली की खपत   

↺ गर्मी के  मौसम में बिजली की खपत करने के लिए मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कुछ कारगर तरीके सुझाये हैंः- ए.सी. के टेम्प्रेचर को 24 से 26 डिग्री के बीच सेट करें। इससे नीचे टेम्प्रेचर करने पर ए.सी. के कंप्रेशर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। ए.सी. ज्यादा देर तक चलता है,इसलिए बिजली भी ज्यादा खर्च होती है और आपका बिल ज्यादा आता है।

ए.सी. के साथ-साथ कमरे में पंखा भी चलाएं। ए.सी. के एयर फिल्टर को हर 10-15 दिनों में अच्छी तरह धोकर साफ करें फिल्टर में धूल जमने में आपको पूरी ठंडक नहीं मिलती और आपको ए.सी. ज्यादा देर तक चलाना पड़ता है। ए.सी. वाले कमरों के खिड़की-दरवाजे ए.सी.चलने के दौरान मजबूती से बंद रखें। यदि दरवाजे-खिड़कियों में झिरियां हों तो उन्हें थर्मोकोल आदि का इस्तेमाल कर सील कर दें। 

कूलर से पूरी ठंडक पाने के लिए जरूरी है कि कूलर जितनी हवा फेंक रहा है उतनी हवा कमरे से बाहर निकलने का भी पूरा इंतजाम हो। कूलर के पैड यदि खराब हो गये हैं तो उन्हें बदलवा लें। कूलर के पंखे और पंप की आइलिंग ग्रीसिंग करा लें। कूलर के पंखे के कंडेंसर की जांच जरूर करायें। कूलर के रेगुलेटर की भी जांच करायें। 

इलेक्ट्रॉनिक रेगुलेटर से बिजली कम खर्च होती है। घर के सब पंखों की सर्विसिंग करा लें। खराब कंडेंसर,बाल बेयरिंग इत्यादि को तुरंत बदलवा लें। पंखे में इलेक्ट्रॉनिक रेगुलेटर का इस्तेमाल करें। रेफ्रिजरेटर में कोई खराबी न भी दिखायी दे रही हो तो गर्मी का मौसम ठीक से शुरू होने के पहले रेफ्रिजरेटर की जांच करा लें।

रेफ्रिजरेटर का दरवाजा बार-बार ना खोलें। रेफ्रिजरेटर का दरवाजा ज्यादा देर तक न खुला रखें।  वायरिंग पुरानी-खराब होने से भी बिजली ज्यादा खर्च होती है और घर में आग लगने का खतरा हो सकता है।                          

अंतर्राष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता आवेदन 7 मार्च  तक 

↺ भारतीय डाक विभाग द्वारा रविवार 13 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। डाक विभाग इस पत्र लेखन प्रतियोगिता में आफ लाईन प्रतियोगिता के साथ-साथ घर बैठे शामिल होने की सुविधा भी दे रहा है। 

ऑफ लाईन भाग लेने के लिए 7 मार्च तक विद्यालय के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। पत्र लेखन का विषय ‘‘राइट ए लेटर टू समवन इन्फ्लूएंशिएल इक्सप्लेनिंग व्हाय एण्ड हाऊ दे शुड टेक एक्शन ऑन द क्लाइमेट क्राइसिस अर्थात प्रभावशाली व्यक्ति को यह बताते हुए पत्र लिखे की उन्हें जलवायु संकट पर क्यों और कैसे कार्यवाही करनी चाहिए’’ निर्धारित किया गया है। 

इस प्रतियोगिता में नौ वर्ष से लेकर 15 वर्ष तक के छात्र-छात्राएं भाग ले सकेंगे। परिमंडल स्तर पर प्रथम तीन विजेताओं को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में क्रमशः 25 हजार रुपये, 10 हजार रुपये एवं 5 हजार रुपये तथा प्रमाण-पत्र प्रदान किया जायेगा। राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में क्रमशः पचास हजार रुपये, 25 हजार रुपये एवं 10 हजार रुपये तथा एक प्रमाण-पत्र प्रदान किया जायेगा।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन विजेता प्रविष्टियों को चयनित करेगा तथा सर्वोत्तम तीन प्रविष्टियों को स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक तथा प्रमाण-पत्र प्रदाय किया जायेगा। साथ ही वैश्विक डाक संघ द्वारा चयनित प्रतिभागियों को अन्य पुरस्कार भी प्रदाय किये जायेंगे। 

स्वर्ण पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को वैश्विक डाक संघ के मुख्यालय बर्न, स्विट्जरलैंड की यात्रा करने का प्रस्ताव या एक वैकल्पिक पुरस्कार यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन के विवेकाधिकार पर निश्चित किया जायेगा। ऑफलाईन भाग लेने के लिए निर्धारित प्रारूप में भरे हुए आवेदन संबंधित विद्यालय के प्राचार्य के माध्यम से प्रवर अधीक्षक डाकघर, भोपाल संभाग के कार्यालय में प्राप्त होने की अंतिम तिथि 7 मार्च है।


“अपराजिता मार्शल आर्ट प्रशिक्षण”

↺ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च से अपराजिता कार्यक्रम में किशोरी बालिकाओं को मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण दिया जायेगा। संचालक, महिला-बाल विकास ने बताया है कि कार्यक्रम में प्रत्येक जिले की 150 किशोरी बालिकाओं को जूडो, कराटे, ताईक्वांडो, बॉक्सिंग एवं कुश्ती में दस दिन का प्रशिक्षण दिया जायेगा खेल और महिला-बाल विकास विभाग के समन्वय से दस दिवसीय मार्शल आर्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला स्तर पर होगा।

महिला-बाल विकास विभाग के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला खेल अधिकारियों से समन्वय कर 8 मार्च से प्रशिक्षण प्रारंभ करना और चयनित बालिकाओं की प्रशिक्षण-सत्र में उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे। प्रशिक्षण के बाद सभी प्रतिभागियों को जिला कार्यक्रम अधिकारी और जिला खेल अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से प्रमाण-पत्र दिये जायेगा। प्रशिक्षण शिविर में शौर्य दल और बालिका गृह की किशोरियों को भी सम्मिलित किया जायेगा।


सागर वॉच/ 08 फ़रवरी/ कलेक्टर ने जिला उपार्जन समिति की बैठक में कहा कि 
समस्त रबी उपार्जन केंद्रों पर भंडारण, परिवहन, बारदाने सहित समस्त मूलभू व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि किसानों के लिए इस बार निशुल्क पंजीयन किए जाएंगे  जिसके लिए उनको पोर्टल  पर जाकर अपनी जानकारी भरनी होगी। इसी प्रकार उपार्जित फसल की भुगतान के लिए भी उपार्जित फसल की राशि सीधे किसानों की खातों में हस्तांतरित होगी इसके लिए उनको बैंक खातों में आधार नंबर लिक होना  अनिवार्य होगा।

कलेक्टर ने बताया कि  मध्यप्रदेश राज्य शासन द्वारा इस वर्ष रबी विपणन वर्ष 2022-23 में समर्थन मूल्य पर गेंहॅू उपार्जित करने के लिये किसानों की सुविधा हेतु पंजीयन एवं उपार्जन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव करने का निर्णय लिया गया है।

पंजीयन व्यवस्था में संशोधन

संशोधित प्रक्रिया में किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। अब किसान स्वयं के मोबाईल से घर बैठे पंजीयन कर सकेंगे किसानों को पंजीयन केन्द्रों में लाईन लगाकर पंजीयन कराने की झंझट से मुक्ति मिलेगी। किसान द्वारा निम्नलिखित स्थानों/तरीकों से पंजीयन कराया जा सकेगा।

पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था
  •  स्वयं के मोबाईल अथवा कम्प्यूटर से पंजीयन हेतु निर्धारित लिंक पर जाकर,
  •  ग्राम पंचायत कार्यालय में स्थापित सुविधा केन्द्र पर,
  •  जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर,
  •  तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्रों पर,
  •  पूर्व वर्षो की भांति सहकारी समिति द्वारा संचालित केन्द्र पर।

उपार्जन प्रक्रिया में संशोधन
पूर्व प्रक्रिया में किसान को फसल बेचने के लिए एसएमएस प्राप्त होता है। एसएमएस से प्राप्त तिथि पर किसान उपार्जन केन्द्र पर जाकर अपनी फसल बेच सकता है। ैडै प्राप्ति की प्रक्रिया में कई बार किसानों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। परिवर्तित व्यवस्था में उपार्जन केन्द्र पर जाकर फसल बेचने के लिए की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है।

परिवर्तित व्यवस्था में फसल बेचने के लिए किसान, निर्धारित पोर्टल से नजदीक के उपार्जन केन्द्र, तिथि और टाईम स्लॉट का स्वयं चयन कर सकेंगे। उपार्जन केन्द्र, तिथि और टाईम स्लॉट का चयन नियत तिथि के पूर्व करना अनिवार्य होगा। सामान्य तौर पर उपार्जन प्रारंभ होने की तिथि से एक सप्ताह पूर्व तक उपार्जन केन्द्र तिथि और टाईम स्लॉट का चयन किया जा सकेगा।

उपार्जित फसल के भुगतान की व्यवस्था में संशोधन
नवीन व्यवस्था में किसानों को उपार्जित फसल का भुगतान उनके आधार नंबर से लिंक खाते में सीधे प्राप्त होगा। उन्हें पहले की तरह पंजीयन के समय बैंक खाता नंबर और आईएफएससी  कोड भरने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। इस व्यवस्था का लाभ लेने के लिए किसानों को आधार कार्ड से अपना मोबाइल नम्बर अनिवार्यतः लिंक कराना होगा। 

कलेक्टर ने कहा कि नयी व्यवस्था के संबंध में किसानों को जागरूक करने के लिए पर्याप्त प्रचार-प्रसार किया जाए। जिले की तहसीलों में संचालित आधार पंजीयन केन्द्रों पर किसान अपना मोबाईल नंबर अपडेट करा सकते है एवं पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है।

गिरदावरी किसान एप को मोबाइल पर गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकेगा। रबी विपणन वर्ष 2022-23 में पंजीयन के विकल्प पर क्लिक करने पर पंजीयन आवेदन प्रदर्शित होगा, आवेदन में किसान का अंग्रेजी नाम दर्ज किया जाए। ग्राम/तहसील/टाउन पर संबंधित जिला का विकल्प चयन करने पर ग्राम के सभी खाता धारक किसानों के नाम प्रदर्शित होगे।

किसान द्वारा पंजीयन हेतु नाम का चयन किया जाएगा एवं नाम चयन करने के उपरांत खसरा बोई के विकल्प पर जाकर संबंधित किसान के खसरों का चयन किया जा सकेगा। किसान द्वारा दर्ज कराए गए नाम एवं भू-अभिलेख डाटा में दर्ज नाम का मिलान के बाद पंजीयन केन्द्र  द्वारा किया  पोर्टल पर प्रविष्टि की जाएगी।

रकबे का पंजीयन किया जा सकेगा
 
किसान को अपने सही आधार नंबर प्रविष्ट करना होगा। आधार प्रविष्टि के उपरांत न्प्क्।प् से पंजीकृत एवं आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर पर व्ज्च् प्राप्त होगा, जिसके माध्यम से सत्यापन उपरांत आधार डाटाबेस में किसान की दर्ज पूर्ण जानकारी न्प्क्।प् से उपार्जन पोर्टल पर प्राप्त होगी।

किसान के पास आधार न होने पर किसान को आधार केन्द्र पर जाकर आधार हेतु आवेदन करना होगा आधार आवेदन पंजीयन पावती क्रमांक के आधार पर भी किसान का पंजीयन किया जा सकेगा। किसान द्वारा दर्ज कराए गए मोबाइल नंबर पर व्ज्च् प्राप्त होगा, प्राप्त व्ज्च् से पोर्टल पर सत्यापन उपरांत किसान पंजीयन सुरक्षित किया जा सकेगा।
 गिरदावरी डाटाबेस में दर्ज किसान के नाम एवं आधार डाटाबेस में दर्ज किसान के नाम का मिलान ई रक्षित करने हेतु उपार्जन पोर्टल पर होने पर पंजीयन सुरक्षित करें विकल्प को करना होगा। संस्थाएं मिलान नहीं करने पर पंजीयन नहीं हो सकेगा।


सफल पंजीयन की जानकारी एसएमएस के माध्यम से किसान को प्राप्त होगी जिसका पोर्टल  में प्रिन्ट भी निकाला जा सकेगा।  पंजीयन में फसल की किस्म, विक्रय योग्य मात्रा एवं कटाई उपरांत फसल के मंडारण स्थल की जानकारी दर्ज होगी।

आधार नंबर का वेरिफिकेशन
पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए के लिए आधार नंबर का वैरिफिकेशन अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से या बायोमेट्रिक डिवाइस से किया जा सकेगा।

किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि भू-अभिलेख में दर्ज खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही उक्त पंजीयन मान्य होगा। 

किसान उपार्जन केन्द्र पर जाकर फसल बेचने के लिए अपने परिवार के किसी सदस्य (पिता, भाई, पति पुत्र आदि) को नामित कर सकेंगे। नामित व्यक्ति का भी आधार वेरीफिकेशन कराया जाएगा। उपार्जन केन्द्र पर आधार के बायोमेट्रिक सत्यापन के उपरात ही नामित व्यक्ति फसल का विक्रय कर सकेंगे।

Innovation-फसलों में नयी जान फूंक रहा है तरल यूरिया

 सागर 26 दिसम्बर 2021

खाद की किल्लत एवं पर्यावरण समस्या दूर करने के लिए जिले के किसान खाद के नए अवतार  तरल यूरिया (नैनो यूरिया) को अपना रहे हैं। जिले में इस साल 15 हजार बोतल नैनो यूरिया की खपत हो चुकी है, जिसे कृषि अधिकारी अच्छा रुझान मान रहे हैं। कृषि विभाग नैनो यूरिया को बढ़ावा भी दे रहा है। किसानों के बीच आयोजित सभाओं में नैनो यूरिया के इस्तेमाल की जानकारी दे रहे हैं।

विशेषज्ञों कि माने  तो  नैनो यूरिया में नाइट्रोजन की बर्बादी कम है, और पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी अच्छा है। इससे जलस्रोत दूषित होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। साथ ही किसानों के लिए यह किफायती भी है, इसका परिवहन व भण्डारण भी बहुत सुगम है।

कृषि विभाग के उप संचालक बी.एल.मालवीय ने कहा है कि नैनो यूरिया पत्तियों के माध्यम से काम करती है। जबकि दानेदार यूरिया जड़ के माध्यम से काम करती है। दानेदार यूरिया का इस्तेमाल करने पर 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा ही पौधों को मिल पाता है। बाकी जमीन और हवा में चला जाता था। 

जबकि नैनो यूरिया का इस्तेमाल करने पर इसके नाइट्रोजन का लगभग 80 से 85 प्रतिशत पौधों में जाता है। नैनो तरल यूरिया को 94 से ज्यादा फसलों पर देश भर में परीक्षण किया गया है। धान, आलू ,गेहूं, मक्का , प्याज , लहसुन और सब्जियों समेत सभी फसलों पर बेहद अच्छे परिणाम मिले हैं।

जैसीनगर क्षेत्र के ग्राम सेमरा गोपालमन के किसान बारेलाल विश्वकर्मा बताते हैं कि नैनो यूरिया का इस्तेमाल अपेक्षाकृत सुलभ है एवं परिणाम बेहतर हैं। खुरई क्षेत्र के ग्राम लहटवास के किसान आशीष जैन बताते हैं कि किसान अब नैनो यूरिया का इस्तेमाल किसान करने लगे हैं। उन्होने बताया कि यह फसल पर अच्छा काम कर रहा है। मैंने भी दो एकड़ में इस्तेमाल किया है। छिड़काव के लिए आधा लीटर नैनो यूरिया 150 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे किया जाता है।


अधिक नाइट्रोजन चाहने वाली फसलों में इसे दो बार 25-30 दिनों एवं 45-50 दिनों पर स्प्रे किया जाता है। नैनो तरल यूरिया के कणों का साइज इतना कम है कि ये पत्ती से सीधे पौधे में प्रवेश कर जाता है। पौधे की जरूरत के अनुसार नाइट्रोजन को रिलीज करता है। 

जबकि दानेदार यूरिया का नाइट्रोजन सिर्फ एक हफ्ते तक काम में आता है। इसमें बेकार जाने वाली यूरिया हवा, पानी, मिट्टी को सबको दूषित करता है। इसी प्रकार से बंडा क्षेत्र के ग्राम बासोना के किसान गोवर्धन विश्वकर्मा ने बताया कि मैंने एक एकड़ में नैनो यूरिया का छिड़काव किया था। इसका परिणाम ऐसा देखने मिला की, आसपास के किसान भी इससे प्रेरित हो रहे हैं।

Smart City Project-इंदौर जैसा स्मार्ट शहर बनेगा  सागर -मुख्यमंत्री

सागर वॉच/ 10 दिसम्बर 2021/
 मुख्यमंत्री शिवराज सिंह 
चौहान ने कहा कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सागर में लगभग 1000 करोड़ रूपये के कार्य कराए जा रहे हैं। इससे सागर शहर की तस्वीर बदल जायेगी। यह इंदौर जैसा स्मार्ट शहर बन जायेगा। लाखा बंजारा झील से पुराने सागर तक बनने वाला एलीवेटेड कॉरीडोर पुराने एवं नये सागर को जोड़ेगा। आगे इसे मेडिकल कॉलेज तक बढ़ाया जाएगा। नगर में 12 करोड़ रूपये की लागत से ऑडिटोरियम बनाया गया है। साथ ही विकास के विभिन्न कार्य कराये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में महिला स्व-सहायता समूहों को सशक्त बनाकर हर बहन की मासिक आमदनी 10 हजार रूपये की जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। शहरी महिलाओं को भी आजीविका मिशन से जोड़ा जा रहा है। स्व-सहायता समूहों को विभिन्न गतिविधियों के लिए धन की व्यवस्था के साथ ही उनके उत्पादों की पैकेजिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था भी की जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री स्व-निधि योजना में सागर प्रदेश में अग्रणी है। यहाँ 8 हजार पथ व्यवसाइयों को व्यवसाय के लिए 10-10 हजार रूपये का बिना ब्याज का ऋण सरकार द्वारा दिलवाया गया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बुंदेलखण्ड को 44 हजार 605 करोड़ रूपये की बड़ी सौगात केन-बेतवा लिंक योजना के रूप में दी है। यह बुंदेलखण्ड के विकास के लिये अद्भुत कार्य है। इस योजना से बुंदेलखण्ड के हर खेत को पानी मिलेगा। इससे यहाँ 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी तथा 62 लाख व्यक्तियों को पीने का पानी मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज सागर में 221 करोड़ रूपये से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण/भूमिपूजन किया। 

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हमारे पूर्व सी.डी.एस. स्व. जनरल बिपिन रावत महान शूरवीर एवं योद्धा थे। ऐसे व्यक्ति सदियों में पैदा होते हैं। मैं उनके चरणों में सादर प्रणाम करते हुए श्रद्धा-सुमन अर्पित करता हूँ। कार्यक्रम में उपस्थित सभी ने दो मिनिट का मौन रखकर स्व. श्री बिपिन रावत को श्रद्धांजलि दी।

लोक निर्माण, कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखण्ड के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान धन्यवाद के पात्र हैं। बेतवा विकास की नदी है। सागर स्मार्ट सिटी का कार्य नगर को नया स्वरूप प्रदान करेगा। लाखा झील को परिष्कृत एवं परिमार्जित करने का कार्य महत्वपूर्ण है।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि केन-बेतवा लिंक योजना बुंदेलखण्ड की तस्वीर बदल देगी। इससे पूरा बुंदेलखण्ड समृद्ध और संपन्न होगा। हमारी सरकार ने सागर में मेडिकल कॉलेज शुरू करने तथा सागर विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय घोषित करवाने का कार्य किया। सागर में एलीवेटेड कॉरीडोर का कार्य महत्वपूर्ण है, इसका दूसरा फेज भी शुरू होगा।

राजस्व एवं परिवहन मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत ने कहा कि सागर में मेडिकल कॉलेज की लम्बे समय से मांग थी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस मांग को पूरा किया। कोरोना काल में कोरोना मरीजों के इलाज में इस मेडिकल कॉलेज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा सागर के चहुँमुखी विकास के लिये विभिन्न कार्य कराये जा रहे हैं। इसके लिये वे बधाई के पात्र हैं।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कार्यक्रम स्थल पर 14 करोड़ 35 लाख रूपये लागत के सभागार का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने 75 करोड़ 60 लाख रूपये की लागत से एलीवेटेडे कॉरीडोर कार्य, 66 करोड़ 88 लाख के बुंदेलखंड कल्चरल एवं इन्फॉर्मेशन सेंटर कार्य, 20 करोड़ 32 लाख के सिटी गवर्नेंस सेंटर एवं 8 जोनल सिटीजन फेसिलिटेशन सेंटर कार्य, 16 करोड़ 36 लाख के ट्रांसपोर्ट नगर एवं मेकेनिक्स कॉम्पलेक्स कार्य, 8 करोड़ 02 लाख डेयरी विस्थापन कार्य का भूमि पूजन किया ।

इसके अलावा  4 करोड़ 88 लाख के फायर स्टेशन भवन निर्माण कार्य, 4 करोड़ 28 लाख के 6 मुक्ति धामों के अपग्रेडेशन कार्य, 3 करोड़ 83 लाख के वृद्धाश्रम निर्माण कार्य, 3 करोड़ 10 लाख के हेरिटेज कंजर्वेशन एवं रेस्टोरेशन कार्य, 2 करोड़ 77 लाख के सीएम राइज स्कूल स्कीम के अंतर्गत एमएलबी स्कूल पुनर्विकास कार्य तथा 83 लाख रूपये के मटेरियल रिकवरी फेसिलिटी निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कार्यक्रम स्थल पर आजीविका मिशन अंतर्गत सोनचिरैया उत्सव का उदघाटन किया और महिला स्व-सहायता समूहों के उत्पादों का अवलोकन कर सराहना की। उन्होंने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की अद्यतन स्थिति का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हित लाभ का वितरित किये।


 

Ken-Betwa Link Project-परियोजना से   उप्र-मप्र में फैले बुंदेलखंड की बदलेगी तकदीर

सागर वॉच/ 10 दिसम्बर 2021 
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने जहां केन- बेतवा परियोजना को मंजूरी देकर बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास के नए दरवाजे खोल दिए हैं, केंद्रीय कैबिनेट की मंज़ूरी मिलने के बाद केन -बेतवा परियोजना को क्रियान्वित करने का रास्ता अब सशक्त हो चुका है। 

जहां अब केंद्र सरकार ने इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाकर तैयार कर ली है। इस परियोजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मध्यप्रदेश की केन नदी के अधिशेष जल को बेतवा नदी में हस्तांतरित करना है।

इस दिशा में पहला पड़ाव था, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के बीच देश में पहली बार, 22 मार्च 2021 को केन - बेतवा परियोजना को लागू करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर । 

यह समझौता पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के दृष्टिकोण को लागू करने के लिए अंतर-राज्य सहयोग की शुरुआत करने के लिए किया गया था। दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव रहा जब केन -बेतवा लिंक परियोजना को बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल से स्वीकृति मिली। इससे  दोनों राज्यों में फैले बुंदेलखंड क्षेत्र में  विकास की एक नई उम्मीद जाग गई है।

'केन -बेतवा परियोजना', नदियों को आपस में जोड़ने के लिये राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (National Perspective Plan) की पहली महत्त्वाकांक्षी परियोजना है। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्यों की सरकारों द्वारा इस पर फिर से कई वर्षों से अमल की जाने की कोशिश की जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मध्यप्रदेश की केन नदी के अधिशेष जल को बेतवा नदी में हस्तांतरित करना है।

पानी की कमी से जूझ रहे बुंदेलखंड क्षेत्र में अब खुशहाली की उम्मीद की जा सकेगी। केन बेतवा परियोजना की लागत 44 लाख 605 करोड़ रुपये है। इस परियोजना से जहां मध्यप्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सागर, दमोह और दतिया ज़िलों में पानी की कमी दूर होगी

वहीं उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर ज़िलों में सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी। इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश के विदिशा, शिवपुरी और रायसेन ज़िलों में, इस परियोजना से करीब 62 लाख लोगों को पेयजल भी उपलब्ध करवाया जा सकेगा।

इस परियोजना के सन्दर्भ में दो बातें महत्वपूर्ण हैं। पहली, इस परियोजना के लागू होने से बुंदेलखंड क्षेत्र को भरपूर फायदे मिलेंगे जैसे सूखे की स्थिति में कमी, बिजली उत्पादन में वृद्धि, कृषि उत्थान, किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल, और जैव विविधता का जीर्णोद्धार इत्यादि। 

दूसरी, केंद्र सरकार ने सभी राजनैतिक मतभेदों को पृथक रखकर यह निर्णय लिया है। यही नहीं, सरकार ने इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए पर्यावरणीय घटकों को भी ध्यान में रखा है, जिससे वन संपदा को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुँचे।

इस परियोजना का सबसे बड़ा अनुकूल प्रभाव किसानों पर पड़ने की उम्मीद है। इससे न सिर्फ बुंदेलखंड क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के स्थायी साधन प्रदान किये जा सकेंगे बल्कि भूजल पर अत्यधिक निर्भरता को कम करके किसानों के लिए स्थायी आजीविका भी सुनिश्चित की जा सकेगी। 

इस बहुउद्देशीय परियोजना के क्रियान्वयन से न केवल जल संरक्षण में तेज़ी आएगी, बल्कि 103 मेगावाट जल-विद्युत का उत्पादन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि पन्ना टाइगर रिज़र्व के जल संकट वाले क्षेत्रों में बांधों का निर्माण होने से पन्ना रिज़र्व के जंगलों का जीर्णोद्धार किया जा सकेगा,और ऐसा होने पर इस क्षेत्र में जैव विविधता समृद्ध हो सकेगी।

कुल 44 हज़ार ,605 करोड़ रुपये की इस परियोजना में  39 हज़ार 317 करोड़ रुपये का  केंद्रीय समर्थन मिलेगा , जिसमें  36 हज़ार 290 करोड़ रुपये का अनुदान और 3,027 करोड़ रुपये का ऋण शामिल है। इस परियोजना के क्रियान्वयन में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाएगा, जो आने वाले 8 वर्षों की अवधि में बुंदेलखंड के वर्तमान रूप को बदलकर एक खुशहाल क्षेत्र का रूप प्रदान करेगा।