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Samwaad-दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने में विद्यालय एवं समाज  महत्वपूर्ण
सागर वॉच / 02 दिसंबर/ 
योगदान है
 यह विचार डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय  में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अभिभावकों के प्रशिक्षण के दौरान अभिभावकों से संवाद करते हुए  सागर के डॉ. संजय शर्मा ने व्यक्त किये  

उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रतिभा को पहचानने एवं उसको प्रोत्साहित करने के लिए पर्याप्त समय और अवसर देना आवश्यक है अभिभावक एवं समुदाय का भावात्मक लगाव बच्चों के आत्मविश्वास को बढाता है. नई शिक्षानीति इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएगी जहाँ विद्यालय और अभिभावक मिलकर शिक्षायी माहौल को समावेशी बनायेंगे।

प्रशिक्षण समन्वयक डायट सागर के प्राध्यापक डॉ. प्रवीण गौतम ने बताया कि दिव्यांग बच्चों के पालकों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण में दिव्यांगजन  अधिनियम-2016 के अंतर्गत समावेशी एवं समग्र शिक्षा, गृह आधारित शिक्षा सहित शासन की प्रमुख योजनाओ के विषय में विस्तार से चर्चा की गई।

जिला शिक्षा केंद्र सागर  के आर.के. आसाटी  ने समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत संचालित योजनाओ एवं सुविधाओं के बारे में अभिभावकों को अवगत कराया. इस डॉ दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में सागर संभाग के दिव्यांग बच्चों के अभिभावक सहभागिता कर रहे थे.

 

Yog Ayog- योग शिक्षा से मिलेगी परोपकारी नागरिक  तैयार करने में मदद-मुख्यमंत्री

सागर वॉच
 मध्यप्रदेश में योग आयोग का गठन किया जाएगा। योग की शिक्षा का कार्य अभियान के रूप में चलेगा। साथ ही योग विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों और अनुभवी योगाचार्यों से मार्गदर्शन प्राप्त किया जाएगा। खेल विभाग की गतिविधियों में भी योग को शामिल किया जाएगा। 

राष्ट्रभक्त, चरित्रवान और परोपकारी नागरिक तैयार करने में भी योग की शिक्षा का उपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ न्यास के संस्थापक स्वामी रामदेव, उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के साथ चर्चा के पश्चात यह जानकारी दी।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने योगपीठ सभाकक्ष में स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण, न्यास के पदाधिकारियों, विद्यार्थियों, उपस्थित नागरिकों, विद्वतजन और आमंत्रित श्रोताओं को अपने संबोधन से मंत्र-मुग्ध कर दिया। 

योगपीठ के सभाकक्ष में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भारतीय सनातन संस्कृति, भारतीय योग परम्परा, विश्व के राष्ट्रों में भिन्न-भिन्न विचारधाराओं के प्रारंभ और समाप्त होने के साथ ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन, वर्तमान वैश्विक चुनौतियों और भारत के नेतृत्व को मिल रहे समर्थन के संबंध में विस्तार से विचार व्यक्त किए। 

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मनुष्य द्वारा मन, शरीर, बुद्धि और आत्मा के सुख की चाह को विभिन्न दृष्टांतों के साथ प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान बाबा रामदेव की उपस्थिति में योगपीठ, हरिद्वार में 'वैश्विक चुनौतियों का सनातन समाधान-एकात्म बोध' संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

योग विज्ञान का महत्व

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने योग विज्ञान के महत्व की जानकारी दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि वे अनेक वर्ष से नियमित रूप से योग कर रहे हैं। मुख्य रूप से प्राणायाम, भस्त्रिका, अनुलोम-विलोम, कपाल भाति आदि के साथ ही श्वांस लेने और छोड़ने के अभ्यास कर रहे हैं। गति के साथ साँस लेने के साथ नई ऊर्जा, नई चेतना और नई शक्ति शरीर को मिलती है, साँस छोड़ने पर अनेक विकार और कुविचार बाहर निकल आते हैं।

सनातन परम्परा में निहित हैं विश्व की समस्याओं के समाधान

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सभी चुनौतियों का समाधान हमारी सनातन परम्परा में पहले से ही मौजूद है। मेरा-तेरा करने का भाव छोटे दिल वालों का होता है, जो विशाल ह्रदय वाले होते हैं, वह कहते हैं पूरी दुनिया ही मेरा परिवार है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि दो इच्छाएँ हर व्यक्ति की होती हैं। एक कोई कभी मरना नहीं चाहता और दूसरा सब सुखी जीवन चाहते हैं। मनुष्य शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का समुच्चय है। अगर मनुष्य को सुखी होना है तो इन चारों को सुखी करना होगा। आज धरती का शोषण हो रहा है।

ग्लोबल वार्मिंग के विषय पर पूरा विश्व चिंतित 

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भारत को विश्व का सिरमौर बनाने के लिए लगे हैं। हम इसमें कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। ग्लोबल वार्मिंग के विषय पर पूरा विश्व चिंतित है। हमारे प्रधानमंत्री हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में वन-सन, वन-ग्रिड और वन-वर्ल्ड की बात कर चुके हैं। 
समावेशी विकास के लिए शांति आवश्यक है। यह विश्व में सबसे बड़ी चुनौती है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में वैभवशाली और गौरवशाली राष्ट्र का निर्माण हो रहा है। राष्ट्र के पुनर्निर्माण के कार्य में स्वामी रामदेव जैसे व्यक्तित्व भी यह उत्तरदायित्व निभा रहे हैं।

एकात्म भाव भारतीय संस्कृति का मूल भाव

हमारी परम्परा में वसुधैव कुटुम्बकम् की बात कही गई है। सारी दुनिया एक परिवार की तरह है। प्राणियों में सद्भावना और विश्व के कल्याण का विचार भारत ने दिया। सर्व-कल्याण का भाव और सभी को आत्म-भाव से देखने की दृष्टि का समर्थन किया गया है। जीव-जन्तु, कीट-पतंग सबमें एक ही चेतना व्याप्त है। 

एकात्म भाव भारतीय संस्कृति का मूल भाव है। भगवान का नरसिंह अवतार हुआ, जिसका अर्थ है कि विश्व में समस्त प्राणियों का सह-अस्तित्व हैं। हमारे आराध्य देवी-देवता लक्ष्मी जी, सरस्वती जी, भगवान शिव और विष्णु भगवान भी पशु-पक्षियों के साथ दृष्टव्य होते हैं। वृक्षों की पूजा हजारों साल से हो रही है। भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की परम्परा के निर्वहन की प्रेरणा दी। भौतिकता की अग्नि में झुलस रहे विश्व को भारत का दर्शन राह दिखाएगा।

योग स्वस्थ रहने का क्रांतिकारी माध्यम

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कोरोना काल में पतंजलि योगपीठ के सहयोग से मध्यप्रदेश में करीब ढाई लाख लोगों ने योग से निरोग का लाभ लेकर स्वास्थ्य लाभ लिया। आज रोगों के उपचार के लिए अनेक औषधियों का प्रयोग होता है, लेकिन योग का अपना विशेष महत्व है। अनेक रोगों का समाधान योग में समाहित है। योग स्वस्थ रहने का एक क्रांतिकारी और कारगर माध्यम है।

मध्यप्रदेश विकास का पर्याय बना: स्वामी रामदेव

योगपीठ न्यास के संस्थापक स्वामी रामदेव ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चौहान ने राष्ट्रधर्म और सेवाधर्म को सबसे ऊपर रखा है। मध्यप्रदेश की पहचान गड्डों वाली सड़कों के राज्य के रूप में थी। आज मध्यप्रदेश विकास का पर्याय बना है। बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा, अंत्योदय के भाव को महत्व देने वाले मुख्यमंत्री श्री चौहान योग, आध्यात्म और भारतीय संस्कृति में विश्वास रखते हैं। आजादी के अमृत महोत्सव में मध्यप्रदेश योग के क्षेत्र में सबसे ऊपर होगा। योग रचना-धर्मिता और मनुष्य की प्रतिभा को बढ़ाता है। योग कर्मकांड नहीं है, जीवन का उत्सव है।

योग साधना में मप्र कर रहा है प्रगति :आचार्य बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण ने स्वागत भाषण में कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान का योग ऋषि के आँगन में स्वागत है। मध्यप्रदेश अन्न उत्पादन में आगे है और पूरे राष्ट्र को मध्यप्रदेश के शरबती गेहूँ का लाभ मिलता है। योग साधना में भी मध्यप्रदेश प्रगति कर रहा है। सभी ग्रामों और स्कूलों तक योग पहुँचाया जा रहा है। यह प्रशंसनीय है।

योगपीठ के सभाकक्ष में मुख्यमंत्री श्री चौहान के आगमन पर सभी उपस्थितों ने हर्ष के भाव से मुख्यमंत्री श्री चौहान और श्रीमती साधना सिंह चौहान का स्वागत किया।

Careeर-Training- बेरोजगारों-के-लिए-उद्यमिता-विकास-प्रशिक्षण-चार -दिसम्बर-से


 सागर वॉच
  22 नवम्बर, 2021। उद्यमिता विकास केन्द्र द्वारा शिक्षित और अशिक्षित बेरोजगारों हेतु शुल्क आधारित उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं पशुपालन आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए पंजीयन प्रारंभ किया गया है। विभिन्न व्यवसायों के लिए पंजीयन की अलग अलग तारीखें तय  की गई है।

प्रशिक्षण सहायक संध्या जोशी ने बताया कि उद्यमिता विकास केन्द्र एम.एस.एम.ई. विभाग के अंतर्गत कार्यरत है। यह मध्यप्रदेश शासन केन्द्रीय वित्तीय संस्थाओं एवं राज्य के अग्रणी बैंकों द्वारा प्रवर्तित पंजीकृत संस्था है। केन्द्र द्वारा आगामी माहों में उद्यमिता एवं पशुपालन से संबंधित विषयों पर शुल्क आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे है। 

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य बेरोजगार युवक-युवतियों को स्वयं के उद्यम अथवा उद्योग स्थापित करने तथा उसके सफल संचालन के लिये तैयार करना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में शासकीय योजनाओं, इच्छित ट्रेड के लिये कच्चामाल, बाजार सर्वेक्षण, यूनिट प्रबंधन, विपणन, लेखा प्रबन्धन तथा करा-रोपण इत्यादि की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण पश्चात प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किये जायेंगे।

प्रशिक्षण सम्बन्धी जानकारी केन्द्र की समन्वयक संध्या जोशी से मोबाईल क्रमांक 8770555820 तथा कार्यालयीन समय में 0755-4000908 पर ली जा सकती है।

पंजीयन
इन तारीखों में कराएं 

डेरी टेक्नोलोजी आधारित पशुपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम 6 से 10 दिसम्बर के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 30 नवम्बर 2021 है।  

उद्यमिता एवं बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम 13 से 17 दिसम्बर के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 08 दिसम्बर,  

उद्यमिता एवं मुर्गी पालन पॉल्ट्रीफार्म प्रशिक्षण कार्यक्रम 20 से 24 दिसम्बर के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 10 दिसम्बर और 

खाद-प्रसंस्करण आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम 27 से 31 दिसम्बर के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 15 दिसम्बर 2021 है। इन प्रशिक्षण के लिए रहवासी शुल्क 7500 और अरहवासी के शुल्क 3500 रूपये रहेगा।

उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम 4 से 6 जनवरी 2022 के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 20 दिसम्बर 2021 है। इस प्रशिक्षण के लिए रहवासी शुल्क 4500 और अरहवासी का शुल्क 2100 रूपये रहेगा। 

बीमा के क्षेत्र में कैरियर निर्माण हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम 20 से 21 जनवरी के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 10 जनवरी 2022 निर्धारित है। इस प्रशिक्षण के लिए रहवासी शुल्क 3 हजार और अरहवासी का शुल्क 1400 रूपये रहेगा।

 Kamdhenu-Study-and-Research-Centre -विवि छात्रों के हॉस्टल की ही तर्ज़ पर गायों के आश्रय भी बनाये

सागर वॉच  केन्द्रीय केबिनेट मंत्री, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार  परषोत्तम रूपाला ने कहा  विश्वविद्यालय को चाहिए कि छात्रों के हॉस्टल की ही तर्ज़ पर गायों के आश्रय के लिए भी एक बड़े केंद्र की स्थापना करे। उनका  मंत्रालय और वो स्वयं भी व्यक्तिगत तौर पर इसमें सहयोग करने को तैयार। 

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के राजमाता सिधिया स्वर्णजयंती सभागार में कामधेनु अध्ययन एवं शोध पीठ की स्थापना पर आयोजित  कार्यक्रम  में अपने उद्बोधन के दौरान उन्होंने ये विचार व्यक्त किये 

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि  गायों की क्षमता अपार है, जरूरत इसे समझने और समझाने की है। दुग्ध उत्पादन, खाद उत्पादन और विभिन्न औषधीय उपयोगों सहित गायों के महत्व को कई पहलुओं को हम बचपन से जानते हैं। दुर्भाग्य से, समय के साथ हम देशी गोवंश का महत्व भूल गए हैं।

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भारतीय परम्परा में समृद्धि की गणना गोधन से ही की जाती थी। यह एक पारंपरिक धन है जो हमें स्वाभाविक ढंग से चतुर्दिक समृद्धि की ओर ले जा सकता है। 

उन्होंने कहा कि गाय ब्रह्माण्ड का मूल आधार है जिससे संबंधित सभी उत्पाद मनुष्य के मनतन और धन को प्रखर कर देते हैं। इसलिए हमारा यह सौभाग्य है कि हमारे जीवन और समाज के सभी अनुष्ठानों में गाय की भूमिका और आशीर्वाद स्वाभाविक रूप से उपलब्ध है। यहाँ से यह संदेश जाना चाहिए कि हम अपने जीवन और कर्म में गौ-स्नेह को नये रूप में पुनर्स्थापित कर सकें। 

उन्होंने कहा कि गौवंशगौमूत्र आदि से होने वाली आय पर गौशाला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती है। आज के समय में ऐसे मॉडल को विकसित और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। कोरोना संकट की तमाम मुश्किलों के साथ इसने हमें यह सिखाया है कि स्वस्थ और सुरक्षित रहने के लिए हमें गौमाता की ही शरण में जाना होगा। 

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विश्वविद्यालय इस शरण को एक व्यापक क्रान्ति में बदल सकेऐसा प्रयत्न इसे करना चाहिए। इसके लिए विश्वविद्यालय कई आयामों एवं उद्देश्यों के प्रोजेक्ट और वित्त संबंधी प्रस्तावों को मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत करे। मंत्रालय निश्चित रूप से इस योजना में विश्वविद्यालय की मदद करेगा। 

कार्यक्रम से पूर्व  विश्वविद्यालय  में कामधेनु अध्ययन और अनुसंधान केंद्र स्थापित करने के लिए विश्वविद्यालय ने मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए है। 

कामधेनु पीठ वोकल फॉर लोकलका मूर्तिमान स्वरूप है : प्रो. नीलिमा गुप्ता

कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने स्वागत वक्तव्य देते हुए अतिथियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और पीठ स्थापित करने में मंत्रालय के सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह एक गौरवशाली एवं ऐतिहासिक क्षण है जहाँ विश्वविद्यालय अपने अकादमिक सरोकारों के अतिरिक्त सामुदायिक सेवा की अपनी प्रतिबद्धता को संस्थानीकरण करते हुए मूर्त रूप देने जा रहा है। मुझे हर्ष है कि हमारी इस पहल को माननीय केन्द्रीय मंत्री के नेतृत्व में उनके सम्पूर्ण विभाग ने तत्परता और प्राथमिकता के साथ स्वीकार किया।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की यह नवाचारी पहल वोकल फॉर लोकलसे अनुप्राणित है। यह एक ऐसा रास्ता है जिससे न केवल विश्वविद्यालय बल्कि समाज और राष्ट्र भी आत्मनिर्भर बनने को वास्तविक अर्थों में साकार कर सकेंगे। 

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21 वीं सदी की पहली राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसके लिए हमें न सिर्फ मार्ग सुझाती है बल्कि संरचना और अवसर भी उपलब्ध कराती हैजहाँ हम इस समुदाय आधारित ज्ञान एवं विज्ञान की ऐतिहासिक समृद्धि को पुनः समझें। 

यह भी एक सुखद संयोग है कि डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, मध्यप्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है और मध्यप्रदेश के पहले कामधेनु अध्ययन एवं शोध पीठ’ की स्थापना भी इसी विश्वविद्यालय में हो रही है। यह एक ऐसा मणिकांचन योग है जिसकी अनुगूँज बहुत दूर तक जायेगी। 

उन्होंने कहा कि गौ-संवर्धन के क्षेत्र में मंत्रालय की विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं को इस पीठ के माध्यम से हमारा विश्वविद्यालय अपने स्तर पर क्रियान्वित कर एक व्यापक सामुदायिक क्रांति में बदलने के लिए संकल्पित है। 

इसके लिए हमारे पास आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से युक्त प्रयोगशालाएँ हैं तो वहीं स्थानीय स्तर पर दयोदय गौशाला जैसा श्रेष्ठ उदाहरण मौजूद हैं। उनके अनुभवों से हमें इस दिशा में कुछ ठोस और श्रेष्ठ करने में सहायता मिलेगी।

विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. वल्लभभाई कथीरिया ने कहा कि यह एक सुअवसर है कि गौ आधारित अर्थव्यवस्था की शुरुआत हो रही है। एक समय में माननीय मालवीय जी ने विश्वविद्यालय में गौशाला स्थापित करने की शुरुआत की थी। 

आज भी यह काम विश्वविद्यालय के माध्यम से किया जा रहा है। यह एक महान काम है। आज पूरे विश्व में पैराडाइम शिफ्ट हो रहा है। विश्व के फलक पर भारतीय संस्कृति अपना विस्तार कर रही है। यह पर्यावरण फ्रेंडली की दिशा में बढ़ाया गया एक कदम भी है। गौ संवर्धन की दिशा में आज एक नया अध्याय जुड़ रहा है.

कामधेनु पीठ बनेगा देश के लिए प्रतिमान : महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानन्द गिरी

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गोपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्डमध्य प्रदेश शासन के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानन्द गिरी ने कहा कि मध्य प्रदेश सर्वाधिक गौ प्रेमी और गौ सेवकों का प्रदेश है। मध्य प्रदेश गौ-संवर्धन आयोग के साथ मिलकर डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में विश्व की सबसे बड़ी गौशाला स्थापित की जा सकती है। कामधेनु पीठ इस अर्थ में एक शुभ कदम है। मैं विश्वास करता हूँ कि यह पीठ देश का एक प्रतिमान बने जहां गौधन संवर्धन के लिए वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन-अध्यापन हो सकेगा। आने वाला समय पंच- गव्य की आर्थिकी का है जिसके द्वारा हमारा समाज आत्मनिर्भर बन सकेगा. मध्य प्रदेश गौ संवर्धन आयोग इसके लिए विश्वविद्यालय को हर संभव मदद देने का आश्वासन देता है।

कामधेनु शोध पीठ स्थापित होना एक सांस्कृतिक घटना: कुलाधिपति

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो.बलवंतराय शांतीलाल जानी ने कहा कि यह शोध पीठ स्थापित होना एक सांस्कृतिक परिघटना है। यह नए भारत का निदर्शन है कि एक मंत्रालय का पूरा अमला अपने मुखिया के साथ एक विश्वविद्यालय में उपस्थित है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति का सुफल है कि संस्थाओं के साथ-साथ लोगों के बीच भी इस तरह के नवाचारी विचार पनप रहे हैं जो भारतीयता एवं राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत है। परम वैभवशाली राष्ट्र निर्माण की राह गौ-माता के प्रति हमारी आस्था से होकर जाती है। हमें ख़ुशी है कि विश्यविद्यालय इस राह का अन्वेषक बन रहा है।

सागर लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजबहादुर सिंह ने कहा कि पीठ स्थापना के लिए आज हुए समझौता ज्ञापन के लिए विश्वविद्यालय को बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूँ। उन्होंने भारत सरकार को इस पुनीत कार्य के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि गाय का महत्व बढ़ाने के लिए बहुत ही सुयोग्य विश्वविद्यालय का चयन किया गया है जिस गाय को हम भगवान का दर्जा देते हैं, मुझे विश्वास है उसके लिए यह पीठ बेहतर कार्य कर सकेगी।

सागर विधानसभा क्षेत्र के विधायक शैलेन्द्र जैन ने कहा कि विश्वविद्यालय में कामधेनु पीठ की स्थापना गौवंश के संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी अकादमिक पहल है। इससे बुंदेलखंड में पारंपरिक रूप से गौवंश के रूप में विद्यमान ज्ञान को प्रयोगात्मक और सैद्धांतिक स्तर पर सब तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर कार्यक्रम की नोडल अधिकारी प्रो. अर्चना पाण्डेय ने कामधेनु पीठ के उद्देश्यों एवं भविष्य की योजनाओं की प्रस्तुति देते हुए बताया कि यह पीठ सागर सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों और समग्रता में बुंदेलखंड के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा जिसमें वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन और पशुधन संरक्षण के तौर-तरीकोंगौ पालन के प्रति उच्च शिक्षा से जुड़े हुए युवाओं को आकर्षित करने और शिक्षित करनेप्रकृति और प्राकृतिक चीजों के प्रति लोगों को संजीदा बनाने जैसे व्यापक उद्देश्य के साथ कार्य करते हुए पंचगव्यगोबरगौमूत्र आदि पर अनुसंधान किया जाएगा। 

 मंत्रालय और विश्वविद्यालय के बीच हुआ एमओयू

इस अवसर पर मत्स्य पालनपशुपालन एवं डेयरी मंत्रालयभारत सरकार एवं विश्वविद्यालय के बीच एमओयू भी हुआ। कामधेनु पीठ द्वारा संचालित की जाने वाली गतिविधियों के संबंध में मंत्रालय और विश्वविद्यालय की भूमिका को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने और मंत्रालय प्रतिनिधि संयुक्त सचिव ओ. पी. चौधरी ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।  

कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशुतोष ने किया। कुलसचिव संतोष सोहगौरा ने मंचासीन अतिथियों सहित कार्यक्रम में पधारे लोगों का आभार व्यक्त किया। डॉ राकेश सोनी के नेतृत्व में विद्यार्थियों द्वारा बरेदी नृत्य की प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में सागर के सम्माननीय जनप्रतिनिधिनागरिकगणमीडियाकर्मी और विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त और सेवारत शिक्षकअधिकारीकर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।        

महर्षि पतंजलि भवन का हुआ लोकार्पण

विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयन्ती सभागार के पीछे स्थित महर्षि पतंजलि भवन का लोकार्पण भी हुआ। इस अवसर पर कामधेनु पीठ स्थापना कार्यक्रम में पधारे गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में भवन का लोकार्पण कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर योग विभाग के विद्यार्थियों ने योग मुद्राओं का प्रदर्शन किया। वर्तमान में इस भवन में प्रबंधन अध्ययन विभागयोग विभाग और संगीत विभाग संचालित हैं।

National-Seminar-कोरोना-काल-में-ऑनलाइन-शिक्षा-देने-के-लिए-हम-नहीं-थे-तैयार-कुलपति



सागर वॉच। 
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्त्वावधान में उच्च-शिक्षा: कोरोना के साथ और कोरोना के बाद विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद 
ई दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ. हरीसिंह विश्वविद्यालय, सागर की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने अपने वक्तव्य में कहा कि कोरोना काल में हम सभी को ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा देने का काम करना पड़ा जिसके लिए हम पूरी तरह तैयार नहीं थे 

इसी सिलसिले में कुलपति ने बताया कि कोरोना काल में इस बात पर विचार करने को विवश होना पड़ा कि हमें पाठ्यक्रमों को इस तरह बनाना पड़ेगा जिससे इस तरह की किसी भी परिस्थिति में हम विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने में कोई भी कठिनाई न हो 

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इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों के अनुसार समन्वित पाठ्यक्रम बनाना होगा. हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रमों में भारतीय संस्कृति के तत्त्वों का समावेश करते हुए समाजोपयोगी पाठ्यक्रम बनाने होंगे 

डिग्री देने के साथ-साथ हमें यह कोशिश करनी होगी कि विद्यार्थी ऐसे पाठ्यक्रम को पढ़कर रोजगार भी पा सकें. उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रमों को बनाने और उनके क्रियान्वयन के लिए एक यूनीवर्सल संरचना और प्रारूप तैयार किये जाने की बात कही जिसमें क्रेडिट ट्रांसफर जैसी लचीली व्यवस्था भी शामिल हो 

उन्होंने कहा कि कौशल आधारित और मूल्यवर्धित पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय के स्वयं के प्रयासों  से शुरू किये जा सकते हैं. कोविड महामारी जैसे अनुभवों के बाद विश्वविद्यालयों को आपदा प्रबंधन से जुड़े हुए पाठ्यक्रम संचालित करने की तरफ बढ़ना चाहिए 

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स्थानीय समुदाय और वृहत्तर स्तर पर समाज के हितों को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम को बनाया जाना चाहिए जिससे विश्वविद्यालय अपनी सामाजिक भूमिका भी निभा सके. इस अवसर पर देश के कई विश्वविद्यालयों के कुलपति और शिक्षाविद् उपस्थित थे

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि धर्मेन्द्र प्रधान, शिक्षा मंत्री, भारत सरकार, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुलभाई कोठारी, भारतीय विश्वविद्यालय संघ की महासचिव डॉ. पंकज मित्तल की उपस्थिति रही 

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Lecture-On-Gandhi-इतिहास-में-गांधी-जैसा चिन्तक-कोई-दूसरा-नहीं-कुलाधिपति

सागर वॉच।
 भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में गांधीजी के आगमन के पहले से ही वि-औपनिवेशीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी थी तिलक, गोखले और मालवीय जी जैसी महान विभूतियों के संपर्क में आकर गांधीजी द्वारा चलाई गई आज़ादी की मुहिम और अधिक बलवती हुई गांधीजी के आदर्श के अनुरूप आचार-विचार और विहार का आपस में संवाद होना चाहिए राष्ट्रभाषा, शिक्षा में मातृभाषा की आवश्यकता और स्वच्छता के संबंध में उनके विचार बहुमूल्य और प्रासंगिक हैं इतिहास में गांधी जी जैसा लेखक, विचारक,और चिन्तक कोई दूसरा नहीं है।

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यह विचार आज़ादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत गांधी जयन्ती के अवसर पर डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के समाज विज्ञान शिक्षण अधिगम केंद्र द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान सत्र में अपने उद्बोधन के दौरान व्यक्त किये स्वतंत्रता का मूल्यबोध और आज़ादी के 75 साल विषय के अंतर्गत यह आयोजन गांधी जी: आचार, विचार और विहार पर केंद्रित था

विशिष्ट अतिथि एवं कुशाभाऊ ठाकरे राष्ट्रीय संचार एवं पत्रकारिता विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति प्रो. बल देवभाई शर्मा ने कहा कि भारत का इतिहास गुलामी का इतिहास नहीं बल्कि सतत संघर्ष का इतिहास है. भारतीयों ने एक क्षण के लिए भी गुलामी नहीं स्वीकार की बल्कि हमेशा प्रतिरोध किया. वीर नारायण सिंह, बिरसा मुंडा से लेकर भगत सिंह, चंद्रशेखर, खुदीराम बोस जैसे क्रांतिकारियों ने देश के लिए अपना बलिदान दिया है

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उन्होंने कहा कि आत्मिक चेतना से ही वास्तविक स्वतन्त्रता का बोध होता है. महात्मा गांधी उसी आत्मिक चेतना के प्रतीक हैं. गांधीजी का जीवन मूल्यबोध और मनुष्यता के उन्नयन के लिए समर्पित था. किसी भी अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम में समूचा विश्व भारत की तरफ देखता है. गांधीजी के विचारों की वैश्विक स्वीकारोक्ति यह प्रमाणित करती है कि दुनिया को रास्ता दिखाने का काम भारत ही कर सकता है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने कहा कि आज भी हम भाषा, शिक्षा, जीवन-मूल्य जैसी अनेक चीजों  के बारे में बात करते समय गांधीजी के विचारों को देखते हैं यही गांधीजी के विचारों का महत्त्व और उनकी प्रासंगिकता है गांधीजी ने आज़ादी के महत्त्व का अहसास कराया है असहयोग, सत्याग्रह, दांडी मार्च और दलित आन्दोलनों के माध्यम से गांधीजी ने देश के भीतर ऊर्जा भरने का काम किया 

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उन्होंने कहा कि हमें यह धारणा बदलनी होगी कि हम बहुत कुछ नहीं बना सकते गांधीजी के आदर्श और विचार न केवल मनुष्यता की राह पर चलना सिखाते हैं बल्कि आत्मनिर्भर बनना भी सिखाते हैं गांधीजी की जयन्ती सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प दिवस है गांधीजी के विचार हमें अपने जीवन में अपनाने होंगे और इसे मिशन बनाना होगा. पूरे देश को बदलने वाले क्रांति पुरुष के मार्ग पर चलने का संकल्प लेकर हम गांधीजी के सपनों का भारत बनाएंगे. उन्होंने इस अवसर पर विश्वविद्यालय में गांधी म्यूजियम बनाने की भी बात कही

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कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों ने डॉ. गौर और गांधीजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. अतिथियों को पुष्पगुच्छ, शाल श्री-फल और गांधीजी का मोमेंटो भेंट किया गया. स्वागत उद्बोधन प्रो. आर. पी. मिश्रा ने दिया

कार्यक्रम में डॉ. आफरीन खान, डॉ. सी. सतीश, डॉ. विवेक जायसवाल, कुलसचिव संतोष सोहगौरा, डॉ. आशुतोष संकायाध्यक्ष प्रो. जी.एस. गिरी, प्रो. डी. के. नेमा, प्रो. के.के. एन. शर्मा, उपकुलसचिव सतीश कुमार, राजभाषा अधिकारी डॉ. छबिल मेहेर, डॉ. संजय शर्मा सहित ऑनलाइन माध्यम से विश्वविद्यालय के कई शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित थेसंकायाध्यक्ष प्रो. जी.एस. गिरी, प्रो. डी. के. नेमा, प्रो. के.के. एन. शर्मा, उपकुलसचिव सतीश कुमार, राजभाषा अधिकारी डॉ. छबिल मेहेर, डॉ. संजय शर्मा सहित ऑनलाइन माध्यम से विश्वविद्यालय के कई शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित थे

Appointment-नए-कुलपति-ने-विश्वविद्यालय-को

सागर वॉच डॉक्टर  हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर की नव नियुक्त कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने 25 सितंबर को पूर्वाह्न कार्यभार ग्रहण कर लिया है विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. गौर की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद प्रो. गुप्ता ने नवीन प्रशासनिक भवन स्थित कुलपति कार्यालय में निवर्तमान कुलपति प्रो. जनक दुलारी आही से कार्यभार ग्रहण किया 

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव संतोष सोहगौरा, प्रो. हेरेल थॉमस,  प्रो. गिरीश मोहन दुबे, प्रो. आशीष वर्मा, उपकुलसचिव सतीश कुमार, मीडिया अधिकारी डॉ. विवेक जायसवाल एवं विश्वविद्यालय के कई शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। 

कार्यभार संभालने के उपरान्त अपने पहले संबोधन में कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने कहा कि यह मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है मुझे डॉ€टर हरीसिंह गौर द्वारा स्थापित इस पावन शिक्षा के मंदिर में कार्य करने अवसर प्राप्त हुआ है. विश्वविद्यालय परिसर में मैं महान दानी सर डॉ. हरीसिंह गौर साहब की उपस्थिति को महसूस कर रही हूँ

मैं उनके सपनों के अनुरूप इस विश्वविद्यालय को अधिकतम ऊंचाई पर ले जाने का हरसंभव प्रयास करूंगी।

Press Meet-समाज को फायदा देने वाले कौशल आधारित कार्यक्रम बनाये जायेंगे -कुलपति

सागर वॉच
। पहली प्राथमिकता भारत सरकार के स्वप्न-परियोजना 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विश्वविद्यालय की अकादमिक संरचना को और अधिक गुणवत्ता  पर होगी. हम कौशल आधारित कार्यक्रम बनायेंगे जिसका लाभ हमारे समाज को भी होगा। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रीय संस्थानात्मक वरीयता ढाँचे  (NIRF ranking) के मानकों के विभिन्न क्षेत्रों में जरूरी काम करेंगे।यह बात डॉक्टर  हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर की नव नियुक्त कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने सागर के पत्रकारों को संबोधित करते हुए कही। 

उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के कारण हमारी शिक्षा प्रणाली में नया बदलाव आया है। इस चुनौतीपूर्ण स्थितियों में भी विश्वविद्यालय अध्ययन-अध्यापन के लिए कटिबद्ध है. मेरा पूरा प्रयास रहेगा कि हमारे विश्वविद्यालय के शिक्षक,अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी सौ प्रतिशत टीकाकृत हों। 

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कन्सल्टेन्सी, परीक्षा, शोध आदि जैसे महत्वपूर्ण मानको को दृष्टिगत रखते हुए अन्य कमियों को दूर करने पर प्रयास करेंगे. विश्व विद्यालय की प्रतिष्ठा जिस किसी भी माध्यम से बढ़ेगी, हम प्रत्येक क्षेत्र में अच्छा काम करने का प्रयास करेंगे। 

मानव संसाधन और भौतिक संसाधनों को बढ़ाने के लिए व्यवस्थित एवं प्रभावी कदम उठाये जायेंगे। विश्वविद्यालय में अध्ययन करने वाली लड़कियों का स्वास्थ्य बेहतर रहे इसके लिए भी हम कई संसाधन जुटाएंगे और कई कार्यक्रमों को लागू करेंगे। लड़कियों के लिए अलग से पिंक शौचालय  स्थापित करना भी विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल होगा 

डॉ. हरीसिंह गौर के सपनों के अनुरूप सागर विवि को शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाईयों तक ले जाने के लिए हम मिलकर प्रयास करेंगे। विवि में शोध कार्यों केे लिए फण्ड की कमी नहीं आने दी जायेगी। विवि परिसर का माहौल ऐसा बनायेंगे कि विद्यार्थी यहीं रहना पसंद करेंगे। 

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खेल गतिविधि में हमारे विश्वविद्यालय को कार्य करने की आवश्यकता है. खेल संसाधनों को बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य एवं खेल संबंधी पाठ्यक्रमों की भी शुरुआत की जायेगी। विश्वविद्यालय को 'फिट इण्डिया अभियान से जोड़ा जाएगा। 

'स्वच्छ भारत अभियान  के माध्यम से भी हमारा विश्वविद्यालय सामुदायिक और सामाजिक प्रतिबद्धता का कर्āाव्य निर्वहन करेगा। मानव विज्ञान विभाग में शिक्षकों के आपसी झगड़ों के संबंध में जानकारी मिलने पर उन्हेांने कहा कि विवि की छवि खराब न हो इस बात का ध्यान रखा जायेगा। 

उच्च शिक्षण संस्थाओं के संबंध में मध्य प्रदेश सरकार की कोरोना गाइड लाइन देखने के बाद हमारा प्रयास होगा कि सागर विवि में जल्द से जल्द ऑफ लाइन कक्षायें प्रारंभ हो सकें। 

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव संतोष सोहगौरा, उपकुलसचिव सतीश कुमार और मीडिया अधिकारी डॉ. विवेक जायसवाल उपस्थित थे।


 Vigilence-Trap-दलपतपुर-संकुल-के-प्राचार्य-और-बाबू-रिश्वत-लेते-पकडे-गए


सागर वॉच। शिक्षा विभाग के दलपतपुर संकुल के प्राचार्य  व बाबू(शिक्षक) को लोकायुक्त ने 3 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा है। इन्होंने फरियादी शिक्षक शा. प्रा. शाला मुड़िया खुर्द की सर्विस बुक व एलपीसी देने के एवज में 5 हजार की रिश्वत मांगी थी।  

लोकायुक्त टीआई बीएम द्विवेदी ने बताया कि आवेदक राघवेंद्र प्रसाद तिवारी निवासी मुड़िया सोसायटी के पीछे वार्ड नम्बर 10 बंडा , ने लोकायुक्त एसपी को शिकायत की थी कि उनकी सर्विस बुक और LPC देने के एवज में दलपतपुर संकुल के प्राचार्य बबलेन्द्र कुमार जैन और बाबू राजेश कुमार राय 5 हजार की रिश्वत मांग रहे हैं। दो हजार रुपये ले चुके हैं। 


प्राप्त शिकायत पुष्टि के बाद  लोकायुक्त एसपी ने  टीआई बीएम द्विवेदी के नेतृत्व में टीम गठित कर छापामार कार्रवाई के निर्देश दिए। टीम गुरूवार को दलपतपुर पहुंची और आवेदक राघवेंद्र के हाथ से पाउडर लगे 3000 रुपये पहुंचाए थे। रिश्वत लेने के बाद राघवेंद्र के इशारे ले बाद टीम ने छापा मारकर दोनों को रँगे हाथ ट्रेप कर लिया।

Education-Update- छतरपुर-विश्वविद्यालय-में-शुरू-होंगे-11-नए-पाठ्यक्रम

सागर वॉच। मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव का कहना है कि  सागर संभाग के छतरपुर में महाराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय में 11 नए कोर्स नए शैक्षणिक सत्र से प्रारंभ होंगे ।  उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में नंबर वन  पर रहे इसके प्रयास निरंतर किये जा रहे है।

मंत्री डॉ यादव  जिले के बांदरी में  शासकीय महाविद्यालय के भवन के भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होने सागर शुक्रवार को सागर आये थे। इस मौके पर मीडिया से चर्चा में उन्होंने बताया कि 11 विषयों में प्रमुख रूप से कृषि विषय ,मेडिकल, पैरामेडिकल शामिल हैं इन विषयों अध्यापन कार्य प्रारंभ होने से जहां उच्च शिक्षा प्राप्त होगी वही रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे ।


उन्होंने कहा कि इन विषयों के शामिल होने से विद्यार्थियों को  अध्ययन करने में सुविधा होगी । मंत्री श्री यादव ने बताया कि   मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य जिसने नई शिक्षा नीति को लागू की है ।इस नई नीति लागू होने से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे । 

मंत्री श्री यादव ने कहा कि  उच्च शिक्षा विभाग के समस्त महाविद्यालय विश्वविद्यालयों में बजट की कोई कमी नहीं आएगी । मंत्री श्री यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं कि उच्च शिक्षा के साथ स्कूली शिक्षा भी देश में नंबर वन पर रहे इसके निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं और कार्य योजना तैयार की जा रही है।


Admission-Open-37-विषयों-पी-एचडी-पाठ्यक्रम-संचालित-होगा

सागर वॉच। 
डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में सत्र 2021-22 की प्रवेश सूचना के जवाब में  देश के अलग-अलग हिस्सों से काफी संख्या में आवेदन प्राप्त हो रहे हैं.20 अगस्त से विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु  शुरू हुई ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया में  विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए सोमवार तक लगभग 11 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं. आवेदन की अंतिम तिथि 09 सितंबर है।

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प्रवेश परीक्षा समन्वयक प्रो दिवाकर शुक्ला ने बताया कि इस वर्ष से एम.ए (शिक्षा शास्त्र) और दो नए डिप्लोमा पाठ्यक्रम बायो इन्फोर्मेटिक्स एवं बिग डाटा एनालिसिस में प्रवेश के लिए भी आवेदन मंगाए गए हैं. छात्रों की सुविधा हेतु प्रवेश परीक्षा फॉर्म भरने के लिए वेब लिंक, विभिन्न विषयों के प्रवेश परीक्षा पाठ्यक्रम और गत वर्षों के परीक्षा प्रश्न-पत्र विश्वविद्यालय की वेबसाईट पर उपलब्ध कराये गए हैं. आवेदकों की समस्या समाधान के लिए विवरणिका में फोन नंबर भी जारी किये गये हैं.

शोध की उपाधि के लिए 37 विषयों में आवेदन आमंत्रित 

इस सत्र में 37 विषयों पी-एचडी पाठ्यक्रम संचालित होगा जिसके लिए कुल 252 सीटों पर प्रवेश होगा. फाइन आर्ट्स, परफार्मिंग आर्ट्स जैसे कई विषयों में पहली बार शोध-पाठ्यक्रम संचालित किये जाएंगे. देश भर के 16 केन्द्रों पर कोरोना नियमावली का पालन करते हुए प्रवेश-परीक्षा आयोजित की जायेगी. प्रवेश परीक्षा तिथियों की घोषणा शीघ्र ही की जायेगी.


 प्रवेश-प्रकोष्ठ के समन्वयक -प्रो. दिवाकर शुक्ला के मुताबिक  विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों के आवेदन काफी संख्या में लगातार प्राप्त हो रहे हैं. हम कोरोना गाइडलाइन के साथ प्रवेश-परीक्षा आयोजित कराने की समुचित तैयारी कर रहे हैं. आवेदन की अंतिम तिथि को ध्यान में रखते हुए अभ्यर्थी समय पूर्व आवेदन कर लें ताकि उन्हें किसी तरह की समस्या न आये.

MP-PSC-EXAMINATION- शहर-में-उनतीस-केन्द्रों-पर-आयोजित-होगी-राज्य-सेवा-परीक्षा

 सागर वॉच   । 20 जुलाई 2021

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग, इंदौर द्वारा राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2020, रविवार 25 जुलाई को प्रातः 10 से 12 बजे एवं दोपहर 2.15 से अपरान्ह 4.15 बजे तक दो सत्रों में जिला मुख्यालय पर आयोजित की जा रही है।

आयोग ने परीक्षा आयोजन की वर्तमान व्यवस्था के अतिरिक्त इस महत्वपूर्ण परीक्षा की प्रक्रियात्मक निष्पक्षता और नागरिकों में उसके प्रति विश्वास  बनाए रखने के लिए संभागवार पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए है। जिसमें सागर संभाग के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवा निवृत अधिकारी  चतुर्भुज सिंह, मो.नं. 9425899944 को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है।


सागर संभाग कमिश्नर मुकेश शुक्ला ने बताया कि संभागीय पर्यवेक्षक अपने संभाग के किसी भी जिले में आवश्यकतानुसार भ्रमण कर सकते है। उन्होंने बताया कि सागर जिले में राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2020 के लिए 29 केन्द्र बनाए गए है। 

  • सेंटमेरी हायर सेकेण्डरी स्कूल, मकरोनिया, 
  • महिला विद्यालय लक्ष्मीपुरा, 
  • जनता हायर सेकेण्डरी स्कूल पुरव्याउ टोरी, 
  • बीटी इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सीलेंस, 
  • ओजस्वनि नर्सिंग कॉलेज, 
  • ज्ञानोदय रेसीडेन्टियल  हायर सेकेण्डरी स्कूल तिली, 
  • डीएनसीबी हायर सेकेण्डरी स्कूल सदर, 
  • एसआर गर्वंमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज सागर, 
  • ज्ञानवीर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एण्ड सांईस  तिली, 
  • इनफिनिटी कॉलेज, 
  • एसव्हीएन सिरोंजा, 
  • जैन हायर सेकेण्डरी स्कूल, 
  • लिटिल स्टार शैलेश मैमोरियल हायर सेकेण्डरी स्कूल, 
  • पंडित मोतीलाल स्कूल जवाहरगंज वार्ड, 
  • हरिसिंह गौर महाविद्यालय लक्ष्मीपुरा, 
  • शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल पुरानी सदर, 
  • सुंदरलाल श्रीवास्तव हायर सेकेण्डरी स्कूल मकरोनिया, 
  • पंडित रविषंकर शुक्ला शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल मोतीनगर, 
  • एमएलबी स्कूल-2, 
  • शासकीय पीजी कॉलेज, 
  • इम्मानुएल स्कूल कैंट, 
  • स्वामी विवेकानंद इंस्टीट्यूट सिरोंजा , 
  • सरस्वती शिशु  मंदिर स्कूल पगारा रोड, 
  • शासकीय बहुउद्देशीय   हायर सेकेण्डरी स्कूल नगर निगम के सामने, 
  • शासकीय बॉयस हायर सेकेण्डरी स्कूल मोरा जी, 
  • शासकीय आर्ट एण्ड कामर्स कॉलेज, 
  • एसएसएचसीजे  मेमोरियल हायर सेकेण्डरी स्कूल रजाखेड़ी मकरोनिया, 
  • एमएलबी स्कूल-1 एवं 
  • सरस्वती शिशु  मंदिर स्कूल रमझिरिया तहसील रोड सागर शामिल है।

Covid-Appropiate-Decisions-प्रदेश-में-एक-जुलाई-से-नहीं-खुलेंगे-स्कूल

सागर वॉच @ प्रदेश में एक जुलाई से स्कूल नहीं खुलेंगे। ऑनलाइन और टीवी के माध्यम से ही पढ़ाई की व्यवस्था जारी रहेगी। स्कूल खोलने के महत्वपूर्ण निर्णय के संबंध में केंद्र सहित अन्य राज्यों और विशेषज्ञों से चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कक्षा 12वीं के अंकों का निर्धारण कक्षा 10वीं के विभिन्न विषयों में प्राप्त अंकों को बेस्ट ऑफ फाइव के आधार पर किया जाए। यदि विद्यार्थी परिणाम सुधारना चाहते हैं तो वे परीक्षा देकर परिणाम सुधार सकते हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में शासकीय और निजी शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थानों में कोविड -19 के दौरान भविष्य की रणनीति के संबंध में गठित मंत्री समूह की अनुशंसाओं पर मंत्रालय में चर्चा कर रहे थे।

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खेल एवं युवा कल्याण, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री  यशोधरा राजे सिंधिया वर्चुअली सम्मिलित हुईं। बैठक में जनजातीय कार्य तथा अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री सुश्री मीना सिंह, चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास सारंग, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव, स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री इंदर सिंह परमार और आयुष राज्य मंत्री श्री रामकिशोर कावरे उपस्थित थे। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती रश्मि अरुण शमी द्वारा प्रस्तुतिकरण दिया गया।

जनजातीय क्षेत्रों में दूरदर्शन के जरिये चलेंगीं कक्षाएँ 

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ऑन-लाइन और हाईब्रिड आधार पर अर्थात वाट्सएप और डिजिटल संसाधनों और टीवी आदि के माध्यम से भी शैक्षणिक गतिविधियाँ जारी रहें। क्लस्टर स्तर पर टीवी उपलब्ध कराने और शाला स्तर पर डिवाइज पूल बनाने जैसी गतिविधियाँ संचालित की जाएँ। जनजातीय क्षेत्रों में शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में दूरदर्शन से सहयोग लिया जाएगा।

शिक्षण संस्थाओं को बनाया जाएगा कोरोना महफूज़ 

मंत्री समूह द्वारा नवीन शैक्षणिक सत्र में संस्थाएँ खोले जाने के संबंध में सभी हितग्राहियों जैसे विद्यार्थी, पालक, संस्था प्रमुख, शिक्षकों और आम नागरिकों से सुझाव प्राप्त कर अनुशंसाएँ प्रस्तुत की गईं। प्राप्त अनुशंसाओं के अनुसार शिक्षकों का प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण कराया जाएगा। शैक्षणिक संस्थाओं में कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के उपायों पर विशेष प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे। शिक्षण संस्थाओं को कोरोना सेफ बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ विकसित की जाएंगी।

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तकनीकी शैक्षणिक संस्थाएँ

मंत्री समूह के प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि तकनीकी शैक्षणिक संस्थाओं में नवीन सत्र का शुभारंभ द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ वर्ष की इंजीनियरिंग कक्षाओं के लिए 2 अगस्त से होगा। प्रथम वर्ष इंजीनियरिंग की कक्षाएँ 15 सितम्बर से आरंभ होंगी।

 प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष डिप्लोमा की कक्षाएँ 17 अगस्त से, आई.टी.आई की द्वितीय वर्ष की कक्षाएँ 12 जुलाई से और आई.टी.आई की प्रथम वर्ष की कक्षाएँ 16 अगस्त से आरंभ होंगी।प्रथम वर्ष इंजीनियरिंग में प्रवेश जेईईई मेन्स तथा मध्यप्रदेश हायर सेकेण्डरी बोर्ड की 12वीं परीक्षा परिणाम के आधार पर होगा। प्रथम वर्ष डिप्लोमा में प्रवेश के लिए हाई स्कूल परीक्षा परिणाम को आधार माना जाएगा। आई.टी.आई की प्रवेश प्रक्रिया 31 जुलाई तक पूर्ण कर ली जाएगी।

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विद्यार्थियों को कोरोना महामारी प्रबंधन का प्रशिक्षण 

पैरामेडिकल डिग्री/डिप्लोमा पात्रता परीक्षाएँ जून-जुलाई माह में होंगी। पैरामेडिकल सर्टिफिकेट परीक्षाएँ जुलाई माह में ली जाएगी। बी.एस.सी. एवं एम.एस.सी. नर्सिंग की परीक्षाएँ मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा जुलाई माह में आयोजित की जाएंगी।

मेडिकल एवं दंत चिकित्सा शिक्षा के अंतर्गत स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए राज्य सरकार द्वारा नीट, यू.जी./पी.जी. की परीक्षा उपरांत सत्र आरंभ किया जाएगा। कक्षाएँ ऑफलाइन पद्धति से संचालित होंगी। कोरोना पेडेंमिक तीसरी लहर की तैयारी के तहत प्रारंभ के 15 दिवस में विद्यार्थियों को कोरोना महामारी प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जायेगा।

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महाविद्यालयीन कक्षाओं के नतीजे अगस्त में खुलेंगे 

मंत्री समूह द्वारा प्रस्तुत अनुशंसाओं में उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत ओपन बुक परीक्षा एवं परीक्षा परिणाम के संबंध में बताया गया कि स्नातक तृतीय वर्ष एवं स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम जुलाई 2021 में, स्नातक प्रथम/द्वितीय वर्ष एवं स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाएँ जुलाई 2021 में और स्नातक प्रथम/द्वितीय वर्ष एवं स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम अगस्त 2021 में जारी किए जाएंगे।

प्रवेश प्रक्रिया एक अगस्त से

स्नातक प्रथम वर्ष एवं स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर के लिए प्रवेश प्रक्रिया एक अगस्त से आरंभ होगी। स्नातक द्वितीय तथा तृतीय वर्ष एवं स्नातकोत्तर तृतीय सेमेस्टर की कक्षाओं के लिए प्रवेश प्रक्रिया एक से 30 अगस्त 2021 तक चलेगी। स्नातक प्रथम, द्वितीय, तृतीय वर्ष तथा स्नातकोत्तर प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर के लिए नवीन सत्र एक सितम्बर से आरंभ होगा।

जिला आपदा प्रबंधन समिति के परामर्श पर महाविद्यालयवार समय सारणी अनुसार विद्यार्थियों की 50 प्रतिशत भौतिक उपस्थिति के साथ कक्षाओं का संचालन किया जाएगा। प्रयोगशालाओं का संचालन विद्यार्थियों की 50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ किया जाएगा। छात्रावासों और ग्रंथालय विद्यार्थियों की भौतिक रूप से उपस्थिति के साथ चरणबद्ध रूप से आरंभ किए जाएंगे।

क्लीनिकल विषय पर 6-6 छात्रों के समूह में लगेंगी कक्षाएँ

मंत्री समूह द्वारा अनुशंसा की गई है कि आयुष से संबंधित संस्थाओं में शैक्षणिक सत्र 2021-22 के प्रवेश नीट परीक्षा 2021 के परीक्षा परिणाम उपरांत ऑनलाइन काउंसलिंग के माध्यम से सम्पन्न कराए जाएंगे। आयुष पाठ्यक्रम की कक्षाओं का संचालन ऑनलाइन मोड में जारी रहेगा। क्लीनिकल विषय के लिए कैम्पस में भौतिक रूप से छात्रों के 6-6 के समूह बनाकर उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।

आयुष परीक्षाएँ होंगीं प्रत्यक्ष तरीके से 

आयुष के अंतर्गत समस्त परीक्षाएँ ऑफलाइन मोड में संचालित की जाएंगी। बीएएमएस की परीक्षाएँ 7 जुलाई से 25 अगस्त तक, बीएचएमएस की परीक्षाएँ 30 जून से 24 जुलाई तक और बीयूएमएस की परीक्षाएँ 30 जून से 30 जुलाई तक आयोजित की जाएंगी।

विद्यार्थियों का शत-प्रतिशत टीकाकरण अनिवार्य 

ख्यमंत्री चौहान ने कहा है कि समस्त शैक्षणिक गतिविधियों में 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के सभी विद्यार्थियों का शत-प्रतिशत टीकाकरण और शैक्षणिक परिसरों में कोविड अनुकूल व्यवहार के अनुसरण की अनिवार्यता सुनिश्चित की जाए। जिनका वैक्सीनेशन नहीं होगा, उन्हें परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाए।